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मणिपुर में फिर भड़का जातीय तनाव, अब कुकी और नागा समुदायों में टकराव

मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के बीच कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया है. चर्च नेताओं की हत्या के बाद हुए अपहरणों और जवाबी कार्रवाई ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है. कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि दोनों समुदाय एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

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अपहरण किए गए छह नागा नागरिकों की सुरक्षित रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं. (Photo: PTI)
अपहरण किए गए छह नागा नागरिकों की सुरक्षित रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं. (Photo: PTI)

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच अब कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव और गहरा गया है. चर्च नेताओं की हत्या, उसके बाद हुए अपहरण और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए आर्थिक नाकेबंदी ने राज्य की स्थिति को और गंभीर बना दिया है. तनाव की शुरुआत 13 मई को हुई, जब नोनी जिले के कोटजिन-कोटलेन इलाके और जौजांगटेक गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया. इस हमले में तीन चर्च नेताओं और एक नागरिक की मौत हो गई. घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और अपहरण की घटनाएं शुरू हो गईं.

अधिकारियों के मुताबिक उसी दिन कांगपोकपी और सेनापति जिलों से 38 से ज्यादा लोगों का अपहरण किया गया. इनमें कुकी और लियांगमाई नागा समुदाय के लोग शामिल थे. प्रशासन ने बताया कि अब तक 31 लोगों को रिहा किया जा चुका है. इनमें कोंसाखुल गांव की 12 नागा महिलाएं, कांगपोकपी जिले के 16 कुकी नागरिक और दो सेल्सियन ब्रदर्स शामिल हैं. हालांकि छह नागा पुरुष अब भी लापता हैं और उनके बंधक बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है. वहीं कुकी इंपी मणिपुर, जो राज्य के कुकी जनजातियों का शीर्ष संगठन है, ने दावा किया है कि 14 कुकी नागरिक अब भी नागा समूहों की हिरासत में हैं.

यह भी पढ़ें: मणिपुर: हत्याओं-अपहरणों को लेकर सड़कों पर नागा और कुकी समुदाय, सरकार से दखल की अपील

दोनों समुदायों के नागरिक संगठनों ने सभी बंधकों को 'जिंदा या मृत' तुरंत रिहा करने की मांग की है और सशस्त्र समूहों से उन्हें प्रशासन तथा परिवारों को सौंपने की अपील की है. इन घटनाओं के बाद मणिपुर के पहाड़ी जिलों में तनाव और बढ़ गया है. इसके चलते राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी और यातायात बाधित हो गया है. कुकी इंपी मणिपुर ने अपहरण और हमले के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूर्ण बंद का ऐलान किया. इसके जवाब में यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने 17 मई से अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी.

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नेशनल हाईवे-2 पर नाकेबंदी से आवाजाही ठप

नाकेबंदी के कारण नेशनल हाईवे-2 (NH-2) पर सैकड़ों ट्रक, यात्री बसें और अन्य वाहन फंस गए हैं, जिससे ड्राइवरों, व्यापारियों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति बिगड़ने के बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने लोगों से बंद और नाकेबंदी से बचने की अपील की है. इंफाल वेस्ट जिले के अखाम माखा लीकाई में शुक्रवार को एक पुल के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शनों का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और आम नागरिकों पर पड़ता है.

मुख्यमंत्री ने कहा, 'सरकार के खिलाफ गुस्से में किए गए बंद और नाकेबंदी से आम लोगों को ही कठिनाई होती है.' उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत और आपसी समझ के जरिए समाधान निकालने की अपील की. इधर शुक्रवार को घाटी क्षेत्र के मैतेई और नागा समुदायों के कई नागरिक संगठनों ने इंफाल वेस्ट जिले के कांगलातोंगबी में संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों के कब्जे में बताए जा रहे छह लापता नागरिकों को सुरक्षित छुड़ाने की मांग की.

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'जॉइंट CSOs ऑफ मणिपुर' के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने स्वदेशी समुदायों पर लक्षित हमलों की निंदा की और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए तीन दिन के भीतर कार्रवाई की मांग की. ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि अगर बंधकों को सुरक्षित नहीं छुड़ाया गया या वे मृत पाए गए तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी. प्रदर्शनकारियों ने अपहरण में शामिल लोगों और कथित मददगारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की.

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प्रदर्शनकारियों ने कुकी नेशनल फ्रंट-प्रेसिडेंशियल (उग्रवादी संगठन) के साथ हुए समझौते को रद्द करने, उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज करने और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के इस्तीफे की भी मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान माखान-कांगलातोंगबी नागा फोरम के अध्यक्ष जूरिस्ट अबोनमाई ने इस घटना को पहले से सुनियोजित हमला और अपहरण बताया और कुकी उग्रवादियों पर स्वदेशी समुदायों को निशाना बनाने का आरोप लगाया. 

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