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New SSLV Launch: भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक, ISRO का नया रॉकेट SSLV होगा लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज देश का नया रॉकेट लॉन्च करने जा रहा है SSLV का फुल फॉर्म है स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल. यानी छोटे सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए अब इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. यह एक स्मॉल-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल है. इसके जरिए धरती की निचली कक्षा में 500 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को निचली कक्षा यानी 500 किलोमीटर से नीचे या फिर 300 किलोग्राम के सैटेलाइट्स को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा जाएगा.

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SSLV को आज लॉन्च किया जाएगा (फोटो: ISRO) SSLV को आज लॉन्च किया जाएगा (फोटो: ISRO)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज देश का नया रॉकेट लॉन्च करने जा रहा है. SSLV की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड एक से की जाएगी. ISRO के सबसे भरोसेमंद PSLV, उसके बाद GSLV और अब SSLV की लॉन्चिंग की जा रही है. 

आज लॉन्च हो रहे SSLV में EOS02 और AzaadiSAT सैटेलाइट्स जा रहे हैं. EOS02 एक अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट हैं. जो 10 महीने के लिए अंतरिक्ष में काम करेगा. इसका वजन 142 किलोग्राम है. इसमें मिड और लॉन्ग वेवलेंथ इंफ्रारेड कैमरा लगा है. जिसका रेजोल्यूशन 6 मीटर है. यानी ये रात में भी निगरानी कर सकता है. इसके अलावा स्पेसकिड्ज इंडिया नाम की स्पेस एजेंसी का स्टूडेंट सैटेलाइट आजादीसैट लॉन्च किया जा रहा है. 

क्या है एसएसएलवी?

एसएसएलवी का फुल फॉर्म है स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV). यानी छोटे सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए अब इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. यह एक स्मॉल-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल है. इसके जरिए धरती की निचली कक्षा (Lower Earth Orbit) में 500 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को निचली कक्षा यानी 500 किलोमीटर से नीचे या फिर 300 किलोग्राम के सैटेलाइट्स को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा जाएगा. सब सिंक्रोनस ऑर्बिट की ऊंचाई 500 किलोमीटर के ऊपर होती है. 

फाइल फोटो

कितना लंबा-चौड़ा है नया SSLV रॉकेट?

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) की लंबाई 34 मीटर यानी 112 फीट है. इसका व्यास 6.7 फीट है. कुल वजन 120 टन है. यह PSLV रॉकेट से आकार में काफी छोटा है. इसमें चार स्टेज हैं. इसके तीन स्टेज सॉलिड फ्यूल से चलेंगे. बल्कि चौथा स्टेज लिक्विड ईंधन से प्रोपेल होगा. पहला स्टेज 94.3 सेकेंड, दूसरा स्टेज 113.1 सेकेंड और तीसरा स्टेज 106.9 सेकेंड जलेगा. चौथे स्टेज के बारे में इसरो ने जानकारी नहीं दी है. 

क्यों पड़ी SSLV रॉकेट की जरूरत? 

SSLV की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि छोटे-छोटे सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए इंतजार करना पड़ता था. उन्हें बड़े सैटेलाइट्स के साथ असेंबल करके एक स्पेसबस तैयार करके उसमें भेजना होता था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे सैटेलाइट्स काफी ज्यादा मात्रा में आ रहे हैं. उनकी लॉन्चिंग का बाजार बढ़ रहा है. इसलिए ISRO ने इस रॉकेट को बनाने की तैयारी की. 

 

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