दिल्ली को लेकर एक पुरानी कहावत है - दिल्ली दूर अस्त। यानि दिल्ली अभी दूर है. ये कहावत फ़िलहाल दिल्ली में मेयर चुनाव पर पूरी तरह फिट बैठती है. क्योंकि पिछले साल 7 दिसंबर को MCD चुनाव के नतीजे आये थे और उसके बाद 2 बार मेयर चुनने के लिए तारीखें तय हुईं, मगर जो तय नहीं हुआ वो था मेयर का नाम. आपको याद दिला दें कि 250 वार्डों में हुए चुनाव में 134 पार्षद आम आदमी पार्टी के जीते थे, बीजेपी को 104 और कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं. आम आदमी पार्टी ने शैली ओबेरॉय तो बीजेपी ने रेखा गुप्ता को कैंडिडेट बनाया.
इसके बाद 6 जनवरी को मेयर का चुनाव रखा गया था. लेकिन चुनाव में जीते हुए काउंसिलर्स की बजाय मनोनीत पार्षदों को पहले शपथ दिलाने के मुद्दे पर हंगामा हो गया था और चुनाव को टाल दिया गया. इसके बाद 24 जनवरी की तारीख़ मुक़र्रर हुई. MCD हेडक्वार्टर्स में पैरामिलिट्री फोर्सेस की सघन मौजूदगी में प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन फिर से हंगामा हो गया और कार्रवाई रोकनी पड़ी. प्रोटेम स्पीकर ने अनिश्चित काल के लिए सदन को स्थगित कर दिया. तो आज का पूरा घटनाक्रम क्या रहा, मेयर का चुनाव क्यों नहीं हो पाया और पेंच कहाँ फंस रहा है, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.
भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस परसों मनाने जा रहा है. आपको पता ही है कि 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान लागू हुआ था और तभी से ये दिन रिपब्लिक डे के तौर पर मनाया जाता है. दिल्ली के राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्यपथ रखे जाने के बाद पहली बार वहां गणतंत्र दिवस समारोह होगा और इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी चीफ गेस्ट होंगे. पांच मंत्रियों और सीनियर अधिकारियों के हाई लेवल डेलीगेशन के साथ प्रेसिडेंट अल-सीसी आज ही नई दिल्ली पहुँच रहे हैं.
यह पहली बार होगा जब खाड़ी देशों में से एक इजिप्ट के राष्ट्राध्यक्ष गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे. इतना ही नहीं, 26 जनवरी की परेड में इजिप्टियन आर्मी का कॉन्टिनजेंट और उसका बैंड भी हिस्सा लेगा. मिस्र में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने सोमवार को बयान जारी करते हुए कहा कि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी का भारत दौरा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. इस दौरे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नई सुबह की शुरुआत होगी. तो रिपब्लिक डे पर इजिप्ट के राष्ट्रपति को चीफ गेस्ट बनाने के पीछे भारत की कूटनीति क्या है एयर इजिप्ट के साथ भारत के रिश्ते कैसे रहे हैं, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.
केरल के कक्कनाड में कुछ रोज़ पहले एक स्कूल में छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. जांच में सामने आया कि बच्चे नोरोवायरस से संक्रमित हैं. डिस्ट्रिक्ट मेडिकल ऑफिसर ने इसकी पुष्टी की है. पहले तो सिर्फ दो ही मामले सामने आए थे, लेकिन अब एर्नाकुलम जिले के सीनियर मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि 62 छात्रों और कुछ पैरेंट्स में नोरोवायरस के लक्षण मिले हैं, जिनमें से दो के सैम्पल को टेस्टिंग के लिए लैब भेजा गया है. इसके बाद सावधानी बरतते हुए पहली से पांचवी तक की क्लास ऑनलाइ मोड में शुरू कर दी गई हैं. राज्य सरकार ने भी कहा है कि वो अपने स्तर पर कई कदम उठाने जा रही है.
केरल में नोरोवायरस का पहला मामला नवंबर 2021 में सामने आया था. तब वायनाड में एक वेटरनरी कॉलेज के 13 छात्र इस वायरस से संक्रमित मिले थे. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल नोरोवायरस के लगभग साढ़े 68 करोड़ मामले सामने आते हैं. इनमें से 20 करोड़ मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में आते हैं. वहीं नोरोवायरस की वजह से हर साल दो लाख मौतें होती हैं, जिनमें से 50 हजार से ज्यादा मौतें छोटे बच्चों की होती हैं. तो सबसे पहले तो ये समझते हैं कि ये नोरोवायरस क्या है, इसका संक्रमण कैसे फैलता है और बचाव के क्या उपाय हैं, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.
24 जनवरी को इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन और नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के तौर पर मनाया जाता है. इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन की शुरुआत 2019 से हुई थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शांति और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इसे सेलिब्रेट करना शुरु किया. इसे सेलिब्रेट करने की मुख्य वजह वंचित और गरीब बच्चों को मुफ्त औऱ बुनियादी शिक्षा उपलब्ध करवाना था. इस बार इसका थीम टू इन्वेस्ट इन पीपल, प्राइओरिटाइज एजुकेशन है . ये तो हो गई इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन की बात, लेकिन भारत आज नेशनल गर्ल चाइल्ड डे भी मनाता है . इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी तब से हर साल 24 जनवरी को इसे मनाया जाता है . इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देशय लड़कियों के प्रति भेदभाव मिटाना और उनके अधिकार के लिए लोगों को जागरूक करना था. 24 जनवरी को इसे सेलिब्रेट करने के पीछे भी एक वजह है. 1966 में पहली बार आज ही के दिन इंदिरा गांधी ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था.
आज जब हम इसे सेलिब्रेट कर रहे हैं तो कुछ दिन पहले स्कूली एजुकेशन पर एक रिपोर्ट आई थी इसे भी देखना चाहिए . इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में लड़कियों के स्कूल जाने में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन अभी भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश औऱ छत्तीसगढ़ में 10 फीसदी से ज्यादा लड़कियां स्कूल से बाहर हैं.
तो नेशनल चाइल्ड डे औऱ इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन मनाने का लड़कियों की शिक्षा पर क्या कोई विशेष असर पड़ा है और गर्ल चाइल्ड एजुकेशन में अर्बन– रूरल डिवाइड कितना दिखता है, सुनिए 'दिन भर' की आख़िरी ख़बर में.