शराब नीति केस में राहत के बाद केजरीवाल ने कहा कि हमें बदनाम करने की कोशिश हुई (Photo: PTI) दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, उनके सहयोगी मनीष सिसोदिया और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएसी) एमएलसी के. कविता को सभी आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि आरोपों को तभी माना जाएगा जब उनके साथ ठोस और पर्याप्त सबूत मौजूद हों, जो इस मामले में जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत नहीं किए जा सके.
सबसे पहले कोर्ट ने आबकारी विभाग के पूर्व कमिश्नर कुलदीप सिंह को बरी किया. इसके बाद मनीष सिसोदिया और अंत में अरविंद केजरीवाल को भी राहत दी गई. कोर्ट ने जांच एजेंसी के सबूतों को कमजोर और अपर्याप्त बताया और चार्जशीट में कई खामियों की भी बात कही. इस फैसले के बाद जांच एजेंसी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने का संकेत दिया है.
इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ मामला फर्जी था, जिसका मकसद उनकी और उनकी पार्टी की छवि धूमिल करना था. केजरीवाल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा रचित सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र बताया और कहा कि उनकी पार्टी के कई नेता जेल गए, जो लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है. उन्होंने जनता को ध्यान देने और देश के वास्तविक मुद्दों जैसे महंगाई, बेरोजगारी, प्रदूषण पर फोकस करने की जरूरत पर जोर दिया.
इस पूरे मामले की शुरुआत 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से हुई थी, जिसमें सीबीआई और ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और घोटाले के आरोप दर्ज किए थे. इस केस में कई नेता जेल भी गए थे. कोर्ट ने साफ कहा कि संवैधानिक पदाधिकारियों पर आरोप लगाने के लिए ठोस सबूत होना जरूरी है, केवल दावों से केस नहीं बनाया जा सकता.
कोर्ट के इस फैसले पर आजतक लगातार नजर बनाए हुए है. इस मामले से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको इस लाइव ब्लॉग में सबसे पहले मिलेगी. अदालत के फैसले के बाद किस नेता, किस पार्टी और किन पक्षों ने क्या प्रतिक्रिया दी, कौन इस फैसले का स्वागत कर रहा है और कौन इसे चुनौती देने की बात कर रहा है - इन सभी अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए.
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली के शराब नीति मामले में आए फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने एक मामले में अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है, लेकिन उनका मानना है कि इससे जांच खत्म नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) इस मामले में अगला कदम उठाएगी और पूरी जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाएगी.
संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सरकारी स्कूलों पर काम कर रही थी. लेकिन उस पार्टी को साजिश के तहत बदनाम किया गया और दिल्ली की सत्ता से हटाने की कोशिश की गई.
उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री में जरा सी भी शर्म है तो उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए और अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार से भी माफी मांगनी चाहिए. मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि राजनीति का यह घिनौना खेल लंबे समय तक नहीं चलता. सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन हार नहीं सकता. अंततः सत्य की जीत होती है और आज सत्य की जीत हुई है.”
संजय सिंह ने आगे कहा कि बार-बार पूछा गया कि अगर कोई सबूत है तो सामने लाया जाए. “कोई रुपया मिला हो, कोई जमीन के कागजात मिले हों, कोई प्लॉट, गहना या सोना मिला हो तो दिखाइए. लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई. आज अदालत के फैसले ने सब स्पष्ट कर दिया.”
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हिंदुस्तान में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है. आम धारणा यह है कि ज्यादातर नेता भ्रष्ट हैं. कई अफसरों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं, चाहे वे आईएएस हों या आईपीएस. खुलेआम पैसों के लेन-देन की बातें समाज में चर्चा का विषय रहती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में अगर कोई अफसर ईमानदारी से काम करता है, जैसे दुर्गा शक्ति नागपाल या अशोक खेमका जैसे अधिकारियों के साथ जो हुआ, वह सबके सामने है. ईमानदारी दिखाने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्होंने हाई कोर्ट के जज मुरलीधर का भी उदाहरण देते हुए कहा कि एक फैसले के बाद रातोंरात उनका तबादला कर दिया गया.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अरविंद केजरीवाल पहले आईआरएस अधिकारी थे, आईआईटी से पढ़े हुए हैं. उन्होंने नौकरी छोड़कर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा. 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन पर भी भ्रष्टाचार का ठप्पा लगा दिया गया। छह महीने जेल में रखा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी डायबिटीज की दवाइयों तक में दिक्कतें डाली गईं और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया.
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के परिवार, बच्चों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर ऐसे आरोपों का असर पड़ता है. समाज में तंज कसे जाते हैं, सवाल उठते हैं. इससे देश में क्या संदेश जाता है. क्या ईमानदार रहना बेकार है. क्या सिस्टम यही बताना चाहता है कि अगर भ्रष्टाचार करो तो समझौते से मामला खत्म हो सकता है.
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाइयों से देश की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि पहले शिकायत दर्ज कराई जाती है, फिर सीबीआई केस दर्ज करती है और उसके बाद यह कहकर कि भ्रष्टाचार हुआ होगा तो मनी लॉन्ड्रिंग भी हुई होगी, ईडी के तहत पीएमएलए का केस लगा दिया जाता है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पीएमएलए के तहत जमानत पाना बेहद मुश्किल होता है और जांच के नाम पर वर्षों तक किसी को जेल में रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर मूल “प्रेडिकेट ऑफेंस” यानी मूल भ्रष्टाचार का केस ही अदालत में गिर गया, तो फिर पीएमएलए का मामला कैसे टिकेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई और ईडी के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. उनका आरोप है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में चुनिंदा तरीके से कार्रवाई की जाती है.
दिल्ली, पंजाब, गुरुग्राम, हैदराबाद, मुंबई, बेंगलुरु - 600 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए. लेकिन क्या एक भी जगह से कोई बड़ी बरामदगी हुई. क्या एक लाख रुपये भी मिले. क्या किसी के नाम कोई प्लॉट मिला. क्या कोई बेनामी संपत्ति सामने आई. दस साल तक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे लोगों के खिलाफ एक ठोस आर्थिक बरामदगी तक नहीं हुई, फिर भी मुकदमा चलता रहा.
सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्णय लिया है, क्योंकि जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को या तो अनदेखा किया गया है या उचित तरीके से विचार नहीं किया गया है.
यह मामला जांच एजेंसी के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, और सीबीआई का मानना है कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में तथ्यों और साक्ष्यों को पूरी तरह से परखा नहीं गया. ऐसे में, न्याय की उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने और सही निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उच्च न्यायालय में अपील करना आवश्यक हो गया है.
आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि छापे मारे गए, लेकिन एक रुपया तक नहीं मिला. बैंक खातों में एक रुपया नहीं मिला. जमीन-जायदाद के कागजों में एक रुपया नहीं मिला. पूरे देश में कार्रवाई की गई, लेकिन न मुख्यमंत्री के घर से कुछ मिला, न किसी आम आदमी पार्टी के नेता के यहां से. फिर भी सबको उठाकर जेल में डाल दिया गया.
आज के फैसले ने साफ कर दिया है कि किस तरह भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल एजेंसियों के इस्तेमाल और संविधान के दुरुपयोग के सहारे चल रही है. इस फैसले ने एक बड़ी उम्मीद जगाई है.
गुजरात में भी मैं वही स्थिति देख रहा हूं. चैतार बसावा को उठाकर फर्जी केस में डाल दिया जाता है. कभी किसानों को जेल में डाल दिया जाता है. हमारे बिदर के जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया. सूरत के नेताओं को उठा लिया गया। लगातार इसी तरह का षड्यंत्र भारतीय जनता पार्टी करती रही है.
मैं भाजपा से कहना चाहता हूं कि गुजरात में लोगों ने आपको 30 साल मौका दिया. अगर काम किया है तो काम के आधार पर चुनाव लड़िए. षड्यंत्र करके, विपक्ष के नेताओं को मुकदमों में फंसाकर, जेल में डालकर, डराकर-धमकाकर चुनाव मत लड़िए. आप इस देश में लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं. इस लोकतंत्र की नींव लाखों लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी कुर्बानी देकर रखी है.
हम भाजपा के लोगों से कहना चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी न डरने वाली है, न बिकने वाली है, न झुकने वाली है, न रुकने वाली है. हम हर विपरीत परिस्थिति में लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे.
शराब नीति मामले में कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत ने लिखा, 'सच की हमेशा जीत होती है. 'आप' सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल जी और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जी को दिल्ली की माननीय अदालत द्वारा शराब घोटाले मामले में बरी कर दिया गया है. माननीय अदालत के इस फैसले ने सच्चाई को सबके सामने ला दिया है. समय के साथ बाकी सभी मामलों की सच्चाई भी सामने आ जाएगी. इंकलाब ज़िंदाबाद.'

दिल्ली शराब नीति मामले में कोर्ट के फैसले के बाद फारूक अब्दुल्ला ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बधाई दी. उन्होंने कहा कि सच की जीत हुई है और न्यायपालिका पर गर्व है. फारूक ने कहा कि अब INDIA गठबंधन और मजबूत होगा और केजरीवाल वापसी करेंगे.
इनपुट: सुनील जी भट्ट
अरविंद केजरीवाल की पत्नी ने कहा कि मैं न्यायाधीशों को तहे दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने सच्चाई को समझा और न्याय का फैसला दिया. यह हमारे लिए एक बड़ी राहत और सम्मान की बात है. अरविंद केजरीवाल ने अपना जीवन पूरी ईमानदारी और मेहनत से जिया है. उनकी लगन और जनता के प्रति समर्पण के कारण ही आज वे देश के एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे हैं. उनकी निष्ठा और सच्चाई ने हमेशा उनके रास्ते को पॉजिटिव और प्रेरणादायक बनाया है.
एक्स पर पोस्ट करते हुए कोर्ट के फैसले पर AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लिखा, 'कोर्ट ने हमारे नेताओं को बरी कर दिया. ये साबित हो गया की देश की सत्ता पर एक खतरनाक षड्यंत्रकारी राज कर रहा है. जिसने साजिश रच कर देश के सबसे लोकप्रिय ईमानदार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सबसे योग्य ईमानदार शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया. सबसे बेहतरीन ईमानदार पार्टी AAP को बदनाम किया. हमारे नेताओं को जेल में यातनाएं दी.
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक कार से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया उतरते हैं तो उनका स्वागत फूलों से किया जाता है.
दिल्ली में शराब घोटाला मामले में AAP के नेताओं को बरी कर दिया. इस मामले पर एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए मनीष सिसोदिया ने लिखा, 'सत्यमेव जयते. आज एक बार फिर बाबा साहेब अम्बेडकर जी की दूरदर्शी सोच और उनके बनाए संविधान पर फ़ख़्र महसूस हो रहा है. मोदी जी की पूरी पार्टी और सारी एजेंसियों की हमें बेईमान साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद आज साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल - मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है.'
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई इस फैसले को लेकर असंतुष्ट है और उच्च न्यायालय से राहत पाने की कोशिश करेगी.
दिल्ली शराब नीति मामले में बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक दिखे. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ फर्जी केस बनाया गया और इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आम आदमी पार्टी को खत्म करने की कोशिश की.
केजरीवाल ने कहा कि आप के पांच बड़े नेताओं को जेल भेजा गया और एक सिटिंग मुख्यमंत्री को घर से गिरफ्तार किया गया, जो पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि वह छह महीने जेल में रहे, जबकि मनीष सिसोदिया लगभग दो साल तक बंद रहे. पूरी खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - शराब घोटाले में बरी होने के बाद रो पड़े अरविंद केजरीवाल, बोले - मैं करप्ट नहीं, पूरा केस फर्जी था