विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई करके स्वदेश लौटे डॉक्टर्स को प्रैक्टिस की अनुमति देने के मामले में राज्यों की मेडिकल काउंसिल पर सवाल उठ रहे थे. इस मामले ने तूल पकड़ा तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई. सीबीआई ने अब मामले की जांच शुरू कर दी है. 14 राज्यों की मेडिकल काउंसिल और विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर भारत लौटे 73 डॉक्टर्स सीबीआई जांच की जद में हैं.
मामला विदेश से पढ़ाई करके भारत आने वाले डॉक्टर्स के लिए जरूरी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) से जुड़ा है. आरोप है कि 14 राज्यों की मेडिकल काउंसिल ने विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई करके वापस लौटे 73 डॉक्टर्स को ये परीक्षा पास किए बिना ही भारत में प्रैक्टिस करने की अनुमति दे दी थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है. अधिकारियों के मुताबिक सीबीआई ने राज्यों की मेडिकल काउंसिल के अज्ञात अधिकारियों और विदेशों से मेडिकल स्नातक 73 डॉक्टर्स के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
FMGE परीक्षा पास करना अनिवार्य
बताया जाता है कि नियमों को ताक पर रखकर 14 राज्यों की मेडिकल काउंसिल ने विदेश से पढ़ाई करके भारत आए 73 मेडिकल स्नातकों को प्रैक्टिस करने की अनुमति दे दी. नियमों के मुताबिक देश के बाहर किसी भी दूसरे देश से मेडिकल की पढ़ाई करके भारत आने वालों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन पास करना अनिवार्य है.
हंगामा तब मचा जब विदेशों से पढ़ाई करके भारत आए 73 डॉक्टर्स को ये परीक्षा पास किए बिना प्रैक्टिस की अनुमति दिए जाने का खुलासा हुआ. दरअसल, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय को ये सूचना दी थी कि साल 2011 से 2022 के बीच विदेशों से पढ़कर आए 73 मेडिकल स्नातकों को बगैर ये परीक्षा पास किए प्रैक्टिस की अनुमति दे दी गई.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने CBI से की थी शिकायत
जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय एक्टिव मोड में आ गया. स्वास्थ्य मंत्रालय ने सीबीआई से मामले की शिकायत की. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत में कहा था कि अयोग्य लोगों की ओर से इस तरह धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्रेशन आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा. इस तरह के कार्य का स्वास्थ्य के क्षेत्र में अन्य राज्यों पर भी प्रभाव पड़ता है.