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चार्जशीट में NIA ने किया दावा- ISI के संपर्क में थे गौतम नवलखा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दावा किया है कि भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा ने 2010-2011 के दौरान अमेरिका का तीन बार दौरा किया था. इस दौरान वह पाकिस्तान स्थित आईएसआई के सक्रिय सदस्य गुलाम नबी फई के संपर्क में थे. फई ने उन्हें आईएसआई के एक जनरल से मिलवाया था.

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भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा
भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एनआईए ने अपनी चार्जशीट में किया दावा
  • माओवादी से संपर्क में रहने का भी है दावा
  • एनआईए ने कोर्ट में दायर किया है चार्जशीट

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)ने दावा किया है कि भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा ने 2010-2011 के दौरान अमेरिका का तीन बार दौरा किया था. इस दौरान वह पाकिस्तान स्थित आईएसआई के सक्रिय सदस्य गुलाम नबी फई के संपर्क में थे. फई ने उन्हें आईएसआई के एक जनरल से मिलवाया था.

गौतम नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसी साल अप्रैल महीने में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण किया था. उन्हें 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में कथित संलिप्तता को लेकर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपी बनाया गया है.

गौतम नवलखा एक समाजसेवक के तौर पर जाने जाते हैं और भीमा कोरेगांव केस में हिंसा फैलाने को लेकर उन पर केस चल रहा है. एनआईए ने 8 अक्टूबर को भीमा कोरेगांव मामले की जांच अपने हाथ में लिए जाने के करीब आठ महीने बाद 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी. 

चार्जशीट में गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे, सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू, कबीर कला मंच के तीन कलाकार- सागर गोरखे, रमेश गाइछोर और उनकी पत्नी ज्योति जगताप, सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी और मिलिंद तेलतुंबडे (आनंद तेलतुंबड़े के भाई) का नाम शामिल है.  

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बहरहाल, एनआईए का दावा है कि गौतम नवलखा ने एक अमेरिकी न्यायाधीश से फई पर तरस खाने के लिए पत्र भी लिखे थे, क्योंकि उसे 2011 में फेडरल जांच ब्यूरो (एफबीआई) की ओर से गिरफ्तार कर लिया गया था. एनआईए ने यह भी दावा किया है कि गौतम नवलखा माओवादियों के संपर्क में थे.

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि गौतम नवलखा ने 2010 से 2011 के बीच तीन बार अमेरिका का दौरा किया था. एनआईए के दावे के मुताबिक गौतम नवलखा फोन और ईमेल के जरिए फई से संपर्क में थे. 

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि गौतम नवलखा आईएसआई के संपर्क में भी थे और उन्हें सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का काम सौंपा गया था.

बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे के पास भीमा कोरेगांव में एक युद्ध स्मारक के पास 1 जनवरी 2018 को हिंसा भड़क गई थी. इसके एक दिन पहले ही पुणे शहर में हुए एल्गार परिषद सम्मेलन के दौरान कथित तौर पर उकसाने वाले भाषण दिए गए थे. पुणे पुलिस ने इस मामले में क्रमश: 15 नवंबर, 2018 और 21 फरवरी, 2019 को एक चार्जशीट और एक पूरक चार्जशीट दायर की थी. बाद में केंद्र सरकार ने इस मामले को एनआईए के हवाले कर दिया था.

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