राजनीतिक लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन पर ही नहीं लड़ी जाती बल्कि परसेप्शन के लेवल पर भी लड़ी जाती है… और जहां तक सवाल है परसेप्शन को तो आजकल इसमें सबसे ज़्यादा जिस टूल का इस्तेमाल होता है वो है सोशल मीडिया. अब ट्विटर, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सएप पर ही एजेंडे सेट किए जाते हैं. इस जंग में कांग्रेस कुछेक मौक़ों के अलावा बीजेपी से पिछड़ी ही नज़र आती रही है. पार्टी को भी इसका एहसास अब शायद हुआ है और फ़ैसला लिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी पैठ मज़बूत की जाएगी. पार्टी ने इसके लिए बाकायदा लोगों से सोशल मीडिया वॉरियर्स टीम से जुड़ने के लिए टोल फ्री नंबर, वॉट्सऐप नंबर, वेबसाइट और ईमेल आईडी जारी की है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी लोगों से इस टीम को ज्वाइन करने की अपील की, लेकिन सवाल कई हैं जैसे, इतनी देरी से क्यों.. या क्या कांग्रेस अब बीजेपी को पछाड़ सकेगी.. इन्हीं सवालों के जवाब दे रहे हैं आजतक रेडियो रिपोर्टर आनंद पटेल.
उत्तराखंड को लेकर पूरा देश फ़िक्रमंद है. चमोली में ग्लेशियर टूटने के बाद अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है. 180 लोग लापता हैं. इस बीच, अब छन-छनकर इस वाक़ये से जुड़ी राहत और मदद की कई कहानियाँ भी सामने आने लगी हैं. तो ऐसी ही कहानियां सुनिए और जानिए कि फिलहाल चमोली में क्या चल रहा है.
म्यांमार जिसे हम बर्मा भी कहते रहे हैं एक पॉलिटिकल संकट में है. हफ़्ते भर पहले सेना ने चुनी हुई सरकार के कामकाज में दखल दिया था जिसके बाद कहा जा रहा था कि तख्तापलट होने वाला है. हालाँकि सेना ने किसी तख्तापलट से तो इनकार किया लेकिन लोगों का ग़ुस्सा बेक़ाबू है. पाँच दशक के बाद दस साल पहले लोगों को डेमोक्रेसी मिली थी और अब फिर से वो नज़रबंद होती दिखने लगी है. डॉक्टरों, नर्सों के बाद अब संत सेना विरोधी प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं. यंगून जिसे हम रंगून कहते हैं.. वहाँ ज़ोरशोर से प्रोटेस्ट हो रहा है. फ़िलहाल सेना ने एक साल के लिए म्यांमार में इमरजेंसी का एलान करते हुए आंग सान सू ची को नज़रबंद कर दिया है. राष्ट्रपति विन मिन के साथ भी यही हुआ है. सू ची के लिए ये कोई नई बात भी नहीं. वो लंबे वक़्त तक नज़रबंद रही हैं और उनकी रिहाई के साथ ही म्यांमार में डेमोक्रेसी का प्रोसेस शुरू हुआ था लेकिन अब फिर से डेमोक्रेसी ख़तरे में हैं तो क्या म्यांमार इस खींचतान से उबर सकेगा… बता रहे हैं प्रोफ़ेसर हर्ष पंत जो इंटरनेशनल अफ़ेयर्स के एक्सपर्ट हैं.
म्यांमार के कू के बाद अब एक कू की बात और करेंगे. ये है भारत की अपनी ऐप कू जो एक तरह से ट्विटर का ऑप्शन मानी जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल मन की बात में भी इस ऐप का ज़िक्र किया था. आत्म-निर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज में भी यह ऐप सोशल कैटेगरी में विजेता रहा है. इस ऐप को सद्गुरु, रविशंकर प्रसाद, अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ जैसे प्रमुख व्यक्ति भी इस्तेमाल करते हैं.उधर भारत समेत पूरी दुनिया में लोकप्रिय व्हाट्सऐप की नई डेटा पॉलिसी को लेकर जहां आम यूजर्स नाराज हो गए हैं. ढेरों यूजर्स टेलीग्राम और सिग्नल ऐप्स डाउनलोड कर रहे हैं. हालांकि, भारत सरकार के अधिकारी इन ऐप्स के बजाय देसी विकल्प 'संदेश' पर भरोसा कर रहे हैं. सोमवार को सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार से जुड़े अधिकारियों के साथ मेसेजिंग प्लेटफॉर्म संदेश की टेस्टिंग की जा रही है, तो जानते हैं कू और संदेश के बारे में.
और जानेंगे आज की तारीख का इतिहास. साथ साथ अख़बारों का हाल भी लेंगे. इतना सब कुछ महज़ आधे घंटे में सुनिए मॉर्निग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ.