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वाइल्डलाइफ कर्मचारियों ने मादा तेंदुआ और 2 शावकों को मिलवाया

पुणे से 90 किलोमीटर दूर नासिक हाइवे की दिशा में जुन्नर तालुका के सोमतवाड़ी गांव में गन्ने के खेत में दो तेंदुआ शावक मिले. कड़ी मशक्कत के बाद वाइल्ड लाइफ कर्मियों ने शावकों को मां से मिलवाया. पूरा वाकया हुआ रिकॉर्ड.

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तेंदुआ शावक
तेंदुआ शावक

पुणे से 90 किलोमीटर दूर नासिक हाइवे की दिशा में जुन्नर तालुका के सोमतवाड़ी गांव में गन्ने के खेत में एक मादा तेंदुआ ने दो शावकों को जन्म दिया और दिन होने पर वह वहां से किसी सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ गई. उससे बिछड़े दो शावकों (बच्चों) को मिलाने में वाइल्ड लाइफ SOS, NGO संघटन और मानिकडोह निवारा केंद्र को कामयाबी मिली है.

गन्ना तोड़ने हुए मजदूर जब सोमंतवाडी में आगे बढ़े तो उन्हें दो नवजात तेंदुआ शावक मिले. खेत मालिक को सूचना देने के बाद उन्हें मानिकडोह निवारा केंद्र भेज दिया गया. गौरतलब है कि जुन्नर इलाके में बड़ी संख्या में तेंदुए दिखाई पड़ जाते हैं और गन्ना तोड़ने के सीजन में खेत में ऐसे शावक मिलते रहते हैं. दिनभर दोनों शावक की देख रेख और मेडिकल ट्रीटमेंट के बाद दोनों शावक को उनके मां से मिलाने का प्रयास तेज हुए. देर रात दोनों शावकों को प्लास्टिक क्रेट में रख दिया गया और प्लास्टिक क्रेट के ऊपर दूसरा क्रेट रख दिया गया ताकि दोनों शावक क्रेट से बाहर न चले जाएं.
बच्चों की मां को देखने के लिए नाइट विजन कैमेरे लगवाये गए. आधी रात में मादा तेंदुआ अपने बच्चों को लेनी आई और मुंह में पकड़ कर चली गई. इस घटना की रिकॉर्डिंग कैमरा में हुई है. इस प्रकार का दृश्य पहली बार कैमरा में दर्ज हुआ है. ऐसी जानकारी मानिकडोह बिबट निवारा केंद्र के पशुवैधकीय अधिकारी डॉक्टर अजय देशमुख ने आज तक को दी.

Wildlife SOS द्वारा ये माणिक डोह केंद्र चलाया जाता है. इस गैर सरकारी संघटन वाइल्ड लाइफ sos का मुख्य ऑफिस दिल्ली में है और देश भर में जंगली जानवरों के बचाव और संरक्षण के तेईस केंद्र हैं. यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा संघटन है जो ऐसे काम करता रहा है. जानवरों को बचाने और उनकी देख भाल का काम यह संघटन राज्य के वन विभाग के अधिकारियो के साथ मिलकर करता रहता है.


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