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शिवाजी से तुलना पर संग्राम, शिवसेना बोली- चुनाव से पहले मोदी को विष्णु अवतार माना था

शिवसेना ने सामना में कहा है कि अभी जो लोग नरेंद्र मोदी को आज के शिवाजी के रूप में संबोधित कर रहे हैं इन्हीं लोगों ने लोकसभा चुनाव के पहले PM मोदी को विष्णु का तेरहवां अवतार माना था. कल विष्णु के अवतार, आज ‘शिवाजी’. इसमें देश, देव और धर्म का अपमान है ही लेकिन मोदी भी घेरे में हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- पीटीआई)

  • शिवाजी से तुलना पर महाराष्ट्र में संग्राम
  • शिवसेना का बीजेपी पर हमला
  • विवाद के बाद बीजेपी ने वापस ली किताब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में संग्राम उठ खड़ा हुआ है. मराठा इतिहास के सर्वोच्च योद्धा को मोदी के बरक्श खड़ा करने पर शिवसेना की त्योरियां चढ़ी हुई है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला किया है और कहा है कि अभी जो लोग पीएम मोदी को 'आज के शिवाजी' के रूप में संबोधित कर रहे हैं इन्हीं लोगों ने लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को विष्णु का तेरहवां अवतार माना था.

पीएम को भी पसंद नहीं आई होगी तुलना

शिवसेना ने के मुखपत्र सामना में लिखा गया है कि शिवाजी महाराज की पीएम मोदी के साथ तुलना महाराष्ट्र की 11 करोड़ जनता को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया है. सामना में लिखा है, "श्री मोदी एक कर्तबगार और लोकप्रिय नेता हैं, देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कोई तोड़ नहीं, फिर भी वे देश के छत्रपति शिवाजी हैं क्या? उन्हें छत्रपति शिवराय का स्थान देना सही है क्या? इसका उत्तर एक स्वर में यही है, नहीं… नहीं...उनकी तुलना जो लोग शिवाजी महाराज से कर रहे हैं उन्होंने छत्रपति शिवाजी राजे को समझा ही नहीं. प्रधानमंत्री मोदी को भी ये तुलना पसंद नहीं आई होगी."

मोदी को विष्णु का भी अवतार माना

शिवसेना ने कहा है कि अभी जो लोग नरेंद्र मोदी को 'आज के शिवाजी' के रूप में संबोधित कर रहे हैं इन्हीं लोगों ने लोकसभा चुनाव के पहले PM मोदी को विष्णु का तेरहवां अवतार माना था. कल विष्णु के अवतार, आज ‘शिवाजी’. इसमें देश, देव और धर्म का अपमान है ही लेकिन मोदी भी घेरे में हैं.

चमचागिरी का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण  है किताब

शिवसेना ने कहा है कि 'आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी' नामक पुस्तक ढोंग और चमचागिरी का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है. शिवसेना के मुताबिक महाराष्ट्र के बीजेपी नेताओं को इस ढोंग का खुलकर विरोध व्यक्त करना चाहिए. सामना में लिखा है, "दिल्ली के कुछ नेता वीर सावरकर के चरित्र को पढ़ें और दिल्ली के भाजपाई नेता छत्रपति शिवाजी महाराज को समझें. इससे गलतफहमी दूर होगी. महाराष्ट्र के छत्रपति शिवराय की गद्दी के सारे वारिस आज भाजपा में हैं. "

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