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शिवसेना की अपील- मुंबई पर बाहरी लोगों का ग्रहण, एक हो जाओ महाराष्ट्र के भूमिपुत्रों

मराठी अस्मिता की ललकार लगाते हुए अखबार लिखता है कि आज फिर भूमिपुत्रों की तथा मराठी स्वाभिमान का योजनाबद्ध ढंग से दमन करने का प्रयास हो रहा है. महाराष्ट्र के खून से मराठी कोशिकाओं को खत्म करने की साजिश रची जा रही है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फोटो-पीटीआई) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फोटो-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सामना में मराठी अस्मिता की ललकार
  • 'भूमिपुत्रों को एक हो जाना चाहिए'
  • 'मुंबई पर पहला हक महाराष्ट्र का'

अभिनेत्री कंगना रनौत, सुशांत सिंह राजपूत केस समेत कई मामलों में विपक्ष के हमले झेल रही शिवसेना ने एक बार फिर मराठा सम्मान का कार्ड खेला है. शिवसेना के मुखपत्र सामना में कहा गया है कि मुंबई के महत्व को कम करने का योजनाबद्ध प्रयास किया जा रहा है; मुंबई की लगातार बदनामी उसी साजिश का हिस्सा है. 

सामना अखबार लिखता है कि मुंबई को पाकिस्तान कहनेवाली एक नटी (अभिनेत्री) के पीछे कौन है? महाराष्ट्र के भूमिपुत्रों को एक हो जाना चाहिए. ऐसा ये मुश्किल दौर आ गया है. अखबार के मुताबिक महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई को ग्रहण लगाने का प्रयास एक बार फिर शुरू हो गया है. ये ग्रहण ‘बाहरी’ लोग लगा रहे हैं. 

सामना में लिखा गया है कि दिल्ली अथवा महाराष्ट्र में सरकार किसी की भी हो, कोई अज्ञात शक्ति हमारी मुंबई के विरोध में योजनाबद्ध ढंग से साजिश करती रहती है लेकिन संयुक्त महाराष्ट्र के लिए जेल के दरवाजे पर कतार लगानेवाले ‘वीर’ आज कुंठित हो गए हैं क्या? 

मराठी अस्मिता की ललकार लगाते हुए अखबार लिखता है कि आज फिर भूमिपुत्रों की तथा मराठी स्वाभिमान का योजनाबद्ध ढंग से दमन करने का प्रयास हो रहा है. महाराष्ट्र के खून से मराठी कोशिकाओं को खत्म करने की साजिश रची जा रही है. सूर्य, चंद्र जब तक रहेंगे, महाराष्ट्र को मुंबई नहीं मिलेगी, ऐसे शब्दों के उच्चारण के साथ ही दावानल की तरह भड़कनेवाले भूमिपुत्र को हमेशा के लिए लाचार बनाने का षड्यंत्र नई राजनीति में रचा गया है. 

अखबार लिखता है कि मुंबई का महत्व, मुंबई का वैभव कम कर देंगे तो महाराष्ट्र का अपने आप पतन हो जाएगा, ऐसा जिनके मन में है, वे भूमिपुत्रों को कम आंक रहे हैं. अखबार कहता है कि मुंबई भूमिपुत्रों की होगी लेकिन उसे धन-धान्य से संपन्न हम लोगों ने ही बनाया है, यह घमंड, अहंकार मुंबई के सेठ लोगों में पहले भी था, आज भी है ही. शिवसेना ने सबसे पहले यही घमंड उतारने का काम किया. इसलिए शिवसेना के प्रति दिल्ली के मन में हमेशा द्वेष भावना रही है. जो शिवसेना के विरोध में बोलेगा, वह दिल्लीश्वर की ‘प्यारी डार्लिंग’ बन जाता है. 

सामना में छपे लेख के मुताबिक मुंबई देश की हो या दुनिया की लेकिन उस पर पहला हक महाराष्ट्र का है. जब-जब मुंबई को दबाया तब-तब महाराष्ट्र ने प्रतिकार किया है. अखबार का मानना है कि जिस दिन 'ठाकरे' ब्रांड का पतन होगा उस दिन से मुंबई का पतन होना शुरू हो जाएगा. 

अखबार लिखता है ‘ठाकरे’ महाराष्ट्र के स्वाभिमान का एक ब्रांड है. दूसरा महत्वपूर्ण ‘ब्रांड’ पवार नाम से चलता है. मुंबई से इन ब्रांड को ही नष्ट करना है व उसके बाद मुंबई पर कब्जा जमाना है. इस साजिश की कलई एक बार फिर खुल गई है.

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