लॉटरी के जरिए तय होगा सीट का रिजर्वेशन Mayor Election: महाराष्ट्र में मुंबई की बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका में अब बारी मेयर के चुनाव की है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई है. अब यह फैसला होने की बारी है कि किस शहर में महिला मेयर होगी और किस शहर में ओबीसी, सामान्य वर्ग या फिर अनुसूचित जाति से होगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे इससे पर्दा उठ जाएगा, क्योंकि शहरी विकास विभाग आरक्षण की प्रक्रिया के जरिए तय कर देगा.
बीएमसी सहित सभी महानगरपालिका में नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा. अलग-अलग शहरों में नवनिर्वाचित पार्षदों की बुलाई जाने वाली स्पेशल मीटिंग में मेयर का चुनाव होगा, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय किया जाना है. तो आज लॉटरी खुलने वाली है, जिसके बाद आगे की राह तय होगी.
बीजेपी-सेना गठबंधन के पास सही उम्मीदवार हैं, अगर लॉटरी से यह तय होता है कि अगला मेयर SC या OBC कैटेगरी का कोई पुरुष या महिला होगा. लेकिन 227 सदस्यों वाली BMC में सिर्फ़ दो ST कॉर्पोरेटर हैं- दोनों शिवसेना (UBT) के हैं. अगर लॉटरी मेयर का पद ST कैटेगरी के लिए रिज़र्व करती है, तो वे ही बैलेट पर एकमात्र कॉर्पोरेटर होंगे.
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आज राज्य सरकार 29 नगर निगमों के लिए ड्रॉ निकालेगी और पूरे राज्य का ध्यान मंत्रालय पर रहेगा. यह ड्रॉ मंत्रालय की छठी मंजिल पर शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल की देखरेख में हो रहा है. 50 फीसदी महिला आरक्षण लागू होने की वजह से, 15 नगर पालिकाओं में महिला मेयर होंगी. इन 15 में से, ज़्यादातर 9 मेयर ओपन कैटेगरी से और 4 OBC महिलाओं में से नॉमिनेट होंगी. दिलचस्प बात यह है कि अगर मुंबई में ड्रॉ ST कैटेगरी के लिए निकलता है, तो शिवसेना UBT भाग्यशाली होगी, जिसे BMC में बहुमत के बिना मेयर मिलेगा. क्योंकि ST कैटेगरी के लिए रिज़र्व दोनों सीटें शिवसेना UBT ने जीती हैं.
प्रियदर्शिनी ठाकरे ने वार्ड 53 से और जितेंद्र वालवी ने वार्ड 121 से अपनी सीट जीती. भविष्य के हालात को देखते हुए शिंदे सेना के उम्मीदवारों ने भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ा, लेकिन वे सीटें जीत नहीं पाए. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बात की संभावना कम है कि ड्रॉ ST कैटेगरी के पक्ष में जाएगा. क्योंकि यह सिस्टम आबादी के हिसाब से काम करता है. जहां ST आबादी ज़्यादा है, वहां आरक्षण के लिए ड्रॉ सबसे पहले उन शहरों के लिए निकलेगा और मुंबई में ST आबादी ज़्यादा नहीं है. इसलिए आबादी और प्रक्रिया के हिसाब से इस बात की बहुत कम संभावना है कि मुंबई का ड्रॉ ST के लिए निकलेगा.
दिलचस्प बात यह है कि ज़्यादातर नगर पालिकाओं में 9 साल बाद चुनाव हुए हैं. इसलिए राज्य सरकार ने आरक्षण के लिए नए सिरे से ड्रॉ निकालने का फैसला किया है. इसलिए रोटेशनल सिस्टम का इस ड्रॉ पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
(Input- Abhijit Karande)
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में मेयर का पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होने के बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं. कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी 50 तो शिवसेना 53 सीटें जीती है. उद्धव की पार्टी के 3 पार्षदों को साथ शिवसेना ने दावा मजबूत किया है.
(इनपुट- समर्थ)
नगर निगम मेयर के पद के लिए आरक्षण के लिए महाराष्ट्र सरकार में शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल के नेतृत्व में लॉटरी निकाली जा रही है. राज्स के सभी 29 नगर निगमों की लॉटरी शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की अध्यक्षता में निकलेगी.
(इनपुट- मुस्तफा)
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित सभी 29 नगर महापालिका में अब बारी मेयर चुनाव की है. ऐसे में सभी की निगाहें मेयर पद के आरक्षण पर टिकी हुई हैं. शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर आरक्षण तय किया जाएगा. लॉटरी ड्रॉ से तय होगा कि किस नगर निगम में किस वर्ग और किस जाति का मेयर चुना जाएगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे शहरी विकास मंत्रालय लॉटरी प्रक्रिया से तय करेगा.
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सुप्रीम कोर्ट में पार्टी सिंबल की सुनवाई से पहले संजय राउत ने कहा, "ये संवैधानिक आधार पर फैसला होना था, फैसला तीन साल में नहीं तीन महीने में आना चाहिए था. ऐसा लगता है सुप्रीम कोर्ट पर पॉलिटिकल दबाव है, इसलिए तारीख पर तारीख चल रही है."
उन्होंने आगे कहा कि आज से आखिरी बहस शुरू होगी और फैसला जल्दी आ जाएगा, हम इंतजार करेंगे. अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो फैसला 1 घंटे में भी आ सकता है, जनता भी जानती है और कोर्ट भी जानती है किय क्या हुआ है. सुप्रीम कोर्ट कौन चला रहा? सुप्रीम कोर्ट को प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह चला रहे हैं.
संजय राउत ने कहा, "मुख्य चुनाव आयोग ने राजनीतिक दबाव में फैसला सुनाया और सिंबल एकनाथ शिंदे को दे दिया."
कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को MNS नेताओं के समर्थन पर, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, "राज ठाकरे इस बात से बहुत दुखी हैं कि स्थानीय लोगों ने यह फैसला कैसे लिया. राज साहब कहते हैं कि यह उनकी और उनकी पार्टी की भूमिका नहीं है. अगर स्थानीय लोगों ने पार्टी के खिलाफ फैसला लिया है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जैसे अंबरनाथ में, जब 12 कांग्रेस पार्षद बीजेपी में शामिल हुए, तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था. हमारी पार्टी में भी, जो भी हमारे खिलाफ काम करता है, उसे निकाल दिया जाता है."