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मुंबई: हाउसिंग सोसायटी में 'टीकाकरण घोटाला', नकली वैक्सीन की डोज देने के आरोप में 'आजतक' की पड़ताल

इस मामले में 'आजतक' ने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से बात की, जिसपर उन्होंने बयान जारी किया. अस्पताल ने कहा कि प्रारंभिक जांच के बाद पता चला है कि हमारे अस्पताल के कर्मचारी राजेश पांडेय अवैध रूप से और बिना अनुमति के इस धोखाधड़ी की गतिविधि में शामिल रहे हैं. इसके बारे में उसने अस्पताल प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी थी. 

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टीकाकरण पर हीरानंदानी सोसायटी के लोगों ने लगाए आरोप टीकाकरण पर हीरानंदानी सोसायटी के लोगों ने लगाए आरोप
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई की हीरानंदानी हाउसिंग सोसायटी का मामला
  • नकली वैक्सीन की डोज देने का आरोप

मुंबई के कांदिवली में 'टीकाकरण घोटाला' (Vaccination Scam) सामने आया है. यहां हीरानंदानी सोसायटी के लोगों ने आरोप लगाया है कि वो 'टीकाकरण घोटाले' का शिकार हुए हैं. सोसायटी के लोगों का आरोप है कि 30 मई को किए गए टीकाकरण के दौरान उन्हें नकली वैक्सीन की डोज लगाई गई. इस मामले की जब 'आजतक' ने पड़ताल ने की तो तीन लोगों के ग्रुप का पता चला जो इस टीकाकरण केस में शामिल थे. 

'आजतक' की पड़ताल में पता चला कि इनमें से एक शख्स मुंबई के टॉप निजी अस्पताल कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का कर्मचारी है. शख्स की पहचान राजेश पांडेय के रूप में हुई है. वह अलग-अलग सोसायटियों, निजी कार्यस्थलों से संपर्क कर टीकाकरण कैंप लगाने की बात करता. मामले में शामिल दूसरे शख्स की पहचान संजय गुप्ता के रूप में हुई है. वह एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी से जुड़ा है और टीकाकरण अभियान के लिए ज्यादा से ज्यादा अधिक क्लाइंट लाने का काम करता था. 

राजेश पांडे और संजय गुप्ता अभी मुंबई पुलिस की हिरासत में हैं. उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है. वहीं कथित रूप से शामिल तीसरे व्यक्ति की पहचान महेंद्र सिंह के रूप में हुई है, वह मुंबई में एक मेडिकल एसोसिएशन का पूर्व प्रमुख है. हालांकि, महेंद्र अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. पुलिस को शक है कि महेंद्र सिंह ही वो शख्स था जो टीके खरीदकर पांडेय और गुप्ता की मदद से टीकाकरण कैंपों का आयोजन हाउसिंग सोसायटी और निजी कार्यस्थल में कर रहा था. 

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इस मामले में 'आजतक' ने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से बात की, जिसपर उन्होंने बयान जारी किया. अस्पताल ने कहा कि हमारे ध्यान में लाया गया है कि हमारे अस्पताल के प्रतिनिधि के रूप में कुछ लोग अनधिकृत रूप से कोविड टीकाकरण अभियान में शामिल हैं. प्रारंभिक जांच के बाद पता चला है कि हमारे अस्पताल के कर्मचारी राजेश पांडेय अवैध रूप से और बिना अनुमति के इस धोखाधड़ी की गतिविधि में शामिल रहे हैं. इसके बारे में उसने अस्पताल प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी थी. 

अस्पताल राजेश पांडेय द्वारा किये जा रहे टीकाकरण कार्यक्रम के किसी भी पहलू में शामिल नहीं है. उनके इस कार्य से हमारी नीतियों और आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन हुआ है. इसलिए हमने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं, उनके इस गैरकानूनी काम की सूचना जांच अधिकारियों को दे दी है. 

अस्पताल की ओर से यह भी कहा कि हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे सतर्क रहें और अपने कार्यस्थल या आवासीय परिसर में किसी भी टीकाकरण अभियान पर कार्रवाई करने या किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें और सत्यापित करें. हमारा अस्पताल सरकारी नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही कार्यस्थलों और आवासीय परिसरों में टीकाकरण शिविर कैंप लगाता है. 

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