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मुंबई में BMC की लैब्स का निष्कर्ष, 60-65% एंटीजन टेस्ट ने गलत निगेटिव रिजल्ट दिखाए

कस्तूरबा हॉस्पिटल की मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी की प्रमुख डॉ जयंती शास्त्री ने कहा, सिम्पटोमेटिक मरीजों में गलत निगेटिव के ऊंचे प्रतिशत का कारण एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता है. क्योंकि किट लिटरेचर के अनुसार एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता 50% है, लेकिन विशिष्टता 100% है.

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कोरोना वायरस की टेस्टिंग (फाइल फोटो-PTI)
कोरोना वायरस की टेस्टिंग (फाइल फोटो-PTI)

  • गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट है RT-PCR टेस्ट
  • कोरोना के एंटीजन टेस्ट पर सवाल

महानगर की दो नागरिक लैब्स के निष्कर्षों से पता चलता है कि एंटीजन टेस्ट शायद अधिक कारगर नहीं हो सकते, क्योंकि जो सिम्पटोमेटिक (लक्षण वाले) मरीज एंटीजन टेस्ट में कोविड-19 के लिए निगेटिव आए, उनमें आधे से अधिक का बाद में RT-PCR टेस्ट में रिजल्ट पॉजिटिव आया. मुंबई में रैपिड एंटीजन टेस्ट में गलत निगेटिव रिजल्ट आने की ऊंची दर इनकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाती है. ये टेस्ट किट्स बृहन्नमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की ओर से सभी के लिए टेस्टिंग वाले ‘मिशन यूनिवर्सल टेस्टिंग’ के तहत इस्तेमाल की जा रही हैं.

डेटा से पता चलता है कि रियल-टाइम पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (RT-PCR) टेस्ट अभी भी कोविड के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट है. नायर अस्पताल में एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वाले 538 सिम्पटोमेटिक मरीजों का दोबारा RT-PCR टेस्ट कराया गया तो उनमें से 60% पॉजिटिव निकले. इसी तरह कस्तूरबा अस्पताल में, 43 मरीजों में से 65% ने ऐसे ही दोबारा RT-PCR टेस्ट में पॉजिटिव रिजल्ट दिखाया.

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जुलाई के बाद से BMC ने लगभग 8872 एंटीजन टेस्ट किए हैं जिसमें 1152 पॉजिटिव निकले. जो सिम्पटोमेटिक मरीज निगेटिव थे, उनका फिर फिर से टेस्ट किया गया और बाद में उनमें से 60-65% पॉजिटिव निकले. कस्तूरबा हॉस्पिटल की मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी की प्रमुख डॉ जयंती शास्त्री ने कहा, "सिम्पटोमेटिक मरीजों में गलत निगेटिव के ऊंचे प्रतिशत का कारण एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता है. क्योंकि किट लिटरेचर के अनुसार एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता 50% है, लेकिन विशिष्टता 100% है."

टेस्ट संवेदनशीलता वो क्षमता है जो बीमारी वाले व्यक्ति की पहचान करती है और वहीं टेस्ट विशिष्टता वो क्षमा है जो बिना बीमारी वाले व्यक्ति की पहचान करती है.

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थायरोकेयर टेक्नोलॉजिज के चेयरमैन और फाउंडर के डॉ वेलुमणि ने कहा, “किट की लागत को देखते हुए रैपिड एंटीजेन टेस्ट कोविड के लिए लागत प्रभावी समाधान नहीं है. यह केवल एक अहसास दे सकता है कि हमने बहुत से लोगों का टेस्ट किया है. ऐसे में टेस्टिंग का अहम मकसद खो गया है, बेशक इसने 20% ही गलत निगेटिव रिजल्ट दिए हों. यह किट के विक्रेताओं की जेबें जरूर भर रहा है, क्योंकि अब तक कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है. अगर इसे 200 रुपये प्रति स्ट्रिप पर बेचा जाए तो इसकी सार्थकता समझ आ सकती है, विशेष तौर पर अस्पताल सेटअप में.”

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) प्रोटोकॉल के मुताबिक यदि सिम्पटोमेटिक मरीज एंटीजन टेस्ट में निगेटिव रिजल्ट दे रहा है, तो पुष्टि के लिए उसका दोबारा RT-PCR टेस्ट होना चाहिए. जो मरीज एसिम्पटोमेटिक (बिना लक्षण वाले) हैं उन्हें RT-PCR टेस्ट से पहले कुछ दिनों के लिए निगरानी में रखा जाना चाहिए.

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