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400 घर गिराए, 600Cr की जमीन छुड़ाई, फिर बांद्रा एक्शन की टाइमिंग पर सवाल क्यों

कोर्ट के आदेश पर पश्चिम रेलवे ने बांद्रा के गरीब नगर में सैकड़ों घरों और दुकानों को गिरा दिया है. इस कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच दो अलग-अलग बातें चल रही हैं. कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं. वहीं, कुछ लोग इस कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं.

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बांद्रा स्टेशन के बाहर गरीब नगर की अवैध झुग्गियों को तोड़ता बुल्डोजर (Photo: PTI)
बांद्रा स्टेशन के बाहर गरीब नगर की अवैध झुग्गियों को तोड़ता बुल्डोजर (Photo: PTI)

मुंबई के बांद्रा ईस्ट में रेलवे के बुलडोजर एक्शन की हर तरफ चर्चा है. यहां गरीब नगर में 400 से ज्यादा अवैध घर गिराए गए हैं. इस कार्रवाई से रेलवे ने करीब 600 करोड़ रुपये की जमीन खाली कराई है. कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई पर वैसे तो सवाल नहीं हैं. लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. सबसे बड़ी वजह मॉनसून है. बारिश बिल्कुल सिर पर खड़ी है. ऐसे वक्त में सैकड़ों परिवार अचानक बेघर हो गए हैं. अब हर कोई यही पूछ रहा है कि क्या रेलवे यह कार्रवाई कुछ हफ्ते बाद नहीं कर सकता था?

इस पूरी घटना को लेकर जमीन पर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. बांद्रा ईस्ट से कलानगर के लिए रोज सफर करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर देवेश ने बताया कि स्टेशन के ठीक बाहर बसी इन झुग्गियों को कोई भी पसंद नहीं करता था. वहां बहुत ज्यादा गंदगी रहती थी, अपराध आम बात थी और सरकारी रेलवे पुलिस यानी जीआरपी की मौजूदगी के बाद भी पैदल पुलों पर नशेड़ी बैठे रहते थे. यहां तक कि इन अतिक्रमण करने वालों की वजह से बेस्ट की बसों ने भी फ्लाईओवर पुल तक जाना बंद कर दिया था, जिससे आम मुसाफिर खुद को असुरक्षित महसूस करते थे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर भी मुंबई के लोगों ने लिखा कि बाहर के लोगों को अंदाजा नहीं है कि यह कितनी बड़ी समस्या थी, जो सालों से एक बीमारी की तरह बढ़ती जा रही थी, इसलिए कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद इस मलबे को साफ करना बेहद जरूरी था.

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कानून और विकास के नजरिए से देखें, तो पश्चिमी रेलवे का यह कदम पूरी तरह वैध और जरूरी हो चुका था. बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे ने पटरियों से सटी करीब 5200 से 5300 वर्ग मीटर की बेहद कीमती जमीन को दोबारा अपने कब्जे में ले लिया है. इस खाली कराई गई जमीन की अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये है. इस जगह का इस्तेमाल रेलवे के विस्तार के लिए किया जाएगा, जिसमें नई लाइनें बिछाई जाएंगी, ताकि बांद्रा टर्मिनस और लोकल स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सके. साथ ही इससे बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी बीकेसी तक पहुंचने का रास्ता भी आसान हो जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद मुंबई के लोगों के लिए 50 नई लोकल ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, जिससे ट्रेनों में भीड़ कम होगी और लाखों लोगों का सफर सुरक्षित हो जाएगा.

Garib Nagar Slum

भारी विरोध और पथराव के बीच सिर्फ 48 घंटे में ढहे सैकड़ों घर

रेलवे की टीम 19 मई को भारी मशीनों, बुल्डोजर, स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ गरीब नगर पहुंची थी. कार्रवाई शुरू होते ही इलाके में हड़कंप मच गया. यहां बनीं झुग्गियां सिर्फ टीन-टप्पर की झोपड़ियां नहीं थीं, बल्कि पटरियों के बेहद करीब बने दो से तीन मंजिला पक्के मकान और दुकानें थीं. रेलवे और कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि ये निर्माण ट्रेन संचालन और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे. कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों की ओर से पथराव भी हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कम से कम 10 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की.

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Mumbai Police Bandra East Garib Nagar Slums

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान समेटने के लिए बहुत कम समय दिया गया. सिर्फ 48 घंटों के भीतर 60 फीसदी से ज्यादा निर्माण ढहा दिया. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक बुजुर्ग महिला रोते हुए यह कहते दिखती हैं कि उन्हें अपने घर से धार्मिक किताब तक निकालने का मौका नहीं मिला.वहीं, सोशल एक्टिविस्ट और पत्रकार सिराज नूरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है कि कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने बच्चों और सामान के साथ खुले मैदान में बैठने को मजबूर हो गए हैं.

Distress Mumbai Garib Nagar slum Bandra East Dharavi

इस कार्रवाई के समय को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

इस साल मॉनसून अपने तय समय से करीब एक हफ्ता पहले आ रहा है. यह 26 मई के आसपास केरल के तट पर दस्तक दे सकता है. इसके बाद जून की शुरुआत तक इसके मुंबई पहुंचने की संभावना है. बारिश शुरू होने में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. ऐसे में हजारों लोग अचानक बिना छत के खुले आसमान के नीचे आ गए हैं.

ये लोग कोई बाहरी नहीं हैं. इनमें रोजाना मेहनत करने वाले मजदूर, सर्विस सेक्टर के कर्मचारी और मुंबई की रफ्तार बनाए रखने वाले जरूरी लोग शामिल हैं. कई परिवार तो यहां 40 साल से भी ज्यादा समय से रह रहे थे. इसके साथ ही इस इलाके में मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है और कुछ ही दिनों में ईद का त्योहार भी आने वाला है. यही वजह है कि इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर लोगों में भारी गुस्सा और कई तरह के सवाल हैं.

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घर उजड़ने से लोगों के गैस चूल्हे जैसी जरूरी चीजें भी मलबे में दब गईं. इसके बाद कुछ एनजीओ के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और बेघर हुए लोगों को खाना और मदद बांटी. लेकिन इस मदद को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई. कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि अवैध कब्जा करने वालों को मदद क्यों दी जा रही है? वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि कानून अपनी जगह सही है, लेकिन इंसानियत और संवेदना को इससे अलग नहीं किया जा सकता.

Garib Nagar slum dwellers' belongings Mumbai Bandra East

इस पूरे मामले का एक पुराना राजनीतिक इतिहास भी है जो अब दोबारा चर्चा में आ गया है. मलबे के बीच बैठे कई लोग खुद को कांग्रेस का पुराना वोटर बता रहे हैं. वे कांग्रेस के दिवंगत नेता और पूर्व सांसद सुनील दत्त को याद कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि एक दौर था जब सुनील दत्त खुद झुग्गियों को बचाने के लिए बुलडोजर के आगे लेट गए थे.

सुनील दत्त ने मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से पांच बार चुनाव जीता था. वे साल 1984 से 2005 तक इस क्षेत्र के सांसद रहे थे. यह गरीब नगर इलाका इसी लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले बांद्रा ईस्ट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. वहां रोती हुई महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबी दूर करने के बजाय गरीबों को ही निशाना बना रही है.

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दूसरी तरफ पश्चिमी रेलवे ने अपना रुख साफ कर दिया है. इस कीमती जमीन पर दोबारा कब्जा रोकने के लिए तुरंत मजबूत तारबंदी की जाएगी. इसके साथ ही साल 2021 के सर्वे के मुताबिक, जो करीब 100 परिवार पुनर्वास के पात्र पाए गए हैं, उन्हें सरकार की ओर से रहने के लिए दूसरी जगह दी जाएगी. विकास की जरूरत और आशियाने उजड़ने के दर्द के बीच फंसी बांद्रा की यह कहानी इस वक्त पूरी मुंबई में एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है.

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