scorecardresearch
 

मुंबई: शख्स को 22 साल बाद मिला चोरी हुआ सोना, 13 लाख के गोल्ड की कीमत अब करोड़ों में

अर्जन दासवानी ने 8 मई 1998 को कोलाबा पुलिस स्टेशन में लूट की शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया था कि चोर उनके घर से सोने के सिक्के, जिन पर विक्टोरिया क्वीन और रानी एलिजाबेथ की फोटो थी, दो गोल्ड ब्रेसलेट और 100 ग्राम और 200 मिलीग्राम वजन की दो सिल्लियां चोरी हुई थीं. उस वक्त इनकी कीमत 13 लाख रुपए थी.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शख्स को 24 साल बाद मिला अपना चोरी हुआ सोना
  • 1998 में शख्स के घर पर हुई थी चोरी

दक्षिण मुंबई के रहने वाले एक शख्स को 22 साल बाद अपना चोरी हुआ करोड़ों रुपए का सोना वापस मिला है. दरअसल, अर्जन दासवानी के कोलाबा स्थित घर से 1998 में चोरी हुई थी. इस दौरान उनका 13 लाख रुपए का सोना भी चोर चुरा ले गए थे. लेकिन अब इस सोने की कीमत करोड़ों रुपए हो गई है. 

अर्जन दासवानी ने 8 मई 1998 को कोलाबा पुलिस स्टेशन में लूट की शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया था कि चोर उनके घर से सोने के सिक्के, जिन पर विक्टोरिया क्वीन और रानी एलिजाबेथ की फोटो थी, दो गोल्ड ब्रेसलेट और 100 ग्राम और 200 मिलीग्राम वजन की दो सिल्लियां चोरी हुई थीं. उस वक्त इनकी कीमत 13 लाख रुपए थी. 

1998 में चोरी हुई 2021 तक चली सुनवाई 

पुलिस ने उसी वक्त इस सोने को बरामद कर लिया था. इसके बाद पुलिस ने जांच की और तीन गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की. इसके बाद सेशन कोर्ट ने 2002 में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया. इसके अलावा इस केस में दो और आरोपी थे जो फरार थे. 

सेशन कोर्ट ने इस दौरान आदेश दिया था कि जब तक फरार आरोपियों के खिलाफ मामला में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, इस संपत्ति को संरक्षित रखा जाए. ऐसे में इस सोने को पुलिस स्टेशन में सुरक्षित रख दिया गया था. 

संभाल कर रखा था सोने का बिल
 
अर्जन दासवानी की 2007 में मौत हो गई थी. उनके बेटे राजू दासवानी ने सभी ऑरिजनल बिल संभाल कर रखे थे ताकि, उन्हें उनका सामान मिल सके. राजू की दो बहनें हैं, एक कनाडा और दूसरी अमेरिका में रहती है. उनका भी इस सोने पर बराबर का अधिकार है. ऐसे में उन्होंने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि इस सामान को उनके भाई को लौटा दिया जाए, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. 
 
राजू ने अदालत से कहा, अगर संपत्ति को वापस करने का आदेश नहीं दिया जाता, तो इसमें अभी कई और साल लगेंगे. क्योंकि फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने में न जाने कितना समय लगेगा. ऐसे में उनका सामान सही मालिक को वापस किया जाए. वहीं, अभियोजन पक्ष ने भी राजू की मांग पर आपत्ति नहीं जताई. हालांकि, राजू द्वारा पेश किए गए बिलों की जांच की गई. 

नहीं तो होगा न्याय व्यवस्था का मजाक

कोर्ट ने कहा, सोने के सामान को पुलिस की हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है. 19 साल से अधिक समय बीत गया. इस मामले में सेशन कोर्ट ने कुछ आरोपियों को बरी किया था. जबकि दो आरोपी फरार हैं. इन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका. ऐसे में अगर सालों तक शिकायतकर्ता को अपनी संपत्ति की वापसी के लिए इंतजार के लिए कहा जाए, तो यह कानून और न्याय व्यवस्था का मजाक होगा. 

हालांकि, कोर्ट ने सोने का सामान सौंपते हुए कहा कि दासवानी सोना नहीं बेच पाएंगे. मामले में फरार आरोपियों के गिरफ्तार होने पर उन्हें सोना पेश करना होगा. यदि वह सोना खो देते हैं या उसे बेच देते हैं. तो उसे 1 लाख रुपये देने होंगे. 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×