
देश के सबसे ज्यादा सूखाग्रस्त इलाकों में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा का नाम भी आता है. इलाके के कई जिलों में बीते कुछ साल में अकाल की वजह से स्थिति बहुत खराब रही है. ये इलाका किसानों की आत्महत्याओं के लिए सुर्खियों में रहता है.
पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र को ही साल के शुरू होने के साथ ही पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है. मार्च आते-आते हालात बहुत खराब हो जाते हैं. अधिक संकट के दिनों में यहां के गांवों में हर दिन लाखों लीटर पानी, टैंकर से पहुंचाया जाता है. लेकिन एक गांव ऐसा भी है जिसने बड़ी संख्या में तालाब बना कर अपनी तकदीर बदल ली है.

बीड जिले के आंबेजोगाई तहसील में आने वाले इस गांव का नाम है कुंभेफल. इस गांव में आपको हर तरफ हरियाली नजर आएगी. ये संभव हो सका है कुंभेफल गांव के लोगों की ओर से बनाए गए 61 तालाबों की वजह से. सरकारी आकड़ों के मुताबिक इस गांव की आबादी महज 3,000 के आसपास है. गांव वालों ने एक हजार हेक्टेयर जमीन पर ही इतनी बड़ी संख्या में तालाब बनाकर अपने यहां होने वाली पानी की समस्या को खत्म कर लिया है.
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कुंभेफल गांव के लोगों ने आजतक से बातचीत में कहा कि कुछ साल पहले तक वे पानी की किल्लत से बेहाल थे. लेकिन इन तालाबों ने पानी की समस्या को दूर कर दिया है. नतीजा ये हुआ है कि गांव के खेतों की उपज कुछ साल पहले की तुलना में अब 35 % बढ़ गई है.
गांव के मौजूदा सरपंच के बेटे गणेश भोसले ने आज तक को बताया कि 2016 तक कुंभेफल की हालत बद से बदतर हो गई थी. उसी साल बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान के ‘पानी फाउंडेशन’ ने गांव में मिट्टी का कटाव रोकने और पानी का बहाव बढ़ाने के लिए गांव और आसपास के नालों की गहराई बढ़ाई.

2018 में तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार की ओर से ‘मांगो तो खेत में मिलेगा तालाब’ योजना चलाई गई. इस योजना के तहत गांव वालों ने गांव में एक साथ 61 आर्टिफिशियल तालाब बनवाए. हर तालाब के लिए राज्य सरकार द्वारा पचास हजार रुपए का अनुदान दिया गया. बड़ा तालाब बनवाने पर सरकार की ओर से 75,000 रुपए मिले. तालाबों के जरिए फसलों की उपज में बढ़ोतरी की वजह से, कुंभेफल गांव के ही गोविंद जाधव को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हाथों ‘आदर्श किसान’ का सम्मान मिल चुका है.

38 साल के ज्योतिराम शिवाजी लुगड़े पहले गांव की स्थिति खराब होने की वजह से पुणे में नौकरी करते थे. लेकिन उन्होंने भी गांव लौटकर तालाब योजना के तहत अपने खेत में 20x20 मीटर का तालाब बनवाया. दस एकड़ की खेती में उन्होंने गन्ना, अदरक, आलू उगाना शुरू किया. पुणे में जहां उनकी सालाना आमदनी एक लाख रुपए थी, अब वो उससे पांच गुना अधिक कमा रहे हैं.
गांव की खुशहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां इंग्लिश मीडियम स्कूल भी है. ज्योतिराम के बेटा-बेटी इसी स्कूल में पढ़ रहे हैं. ज्योतिराम का कहना है कि बड़ी संख्या में तालाब बनने, पानी फाउंडेशन की ओर जल संचारण की दिशा में किए काम की वजह से गांव वालों के जीवनस्तर में क्रांतिकारी सुधार हुआ है. अब वो अपने खेतों में फल, सब्जियां उगा कर बड़े शहरों की मंडियों में अच्छे दाम पर उन्हे बेच रहे हैं.