महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले मराठी कार्ड खेला है. सरकार मराठों को 20 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी में है. आरक्षण का फायदा शिक्षा और रोजगार में मिलेगा. आरक्षण देने के बारे में 21 जून तक आखिरी फैसला हो सकता है.
मराठों को आरक्षण देने पर बने आयोग की अगुवाई महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे कर रहे हैं. कांग्रेस नेता राणे ने आज राज्य विधानसभा को जानकारी दी कि राज्य सरकार मराठा आरक्षण पर 21 जून को फैसला लेगी. उन्होंने कहा कि यह आरक्षण राजनीति में नहीं बल्कि केवल शिक्षा और नौकरियों में दिया जाएगा.
राणे ने यह भी भरोसा दिया कि सरकार ओबीसी को मिलने वाले 27 फीसदी आरक्षण से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेगी. यदि मराठा आरक्षण लागू होता है तो राज्य में कुल आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 72 फीसदी हो जाएगा.
राज्य में विधानसभा चुनाव अक्तूबर में होने हैं. मराठों के एक ओबीसी धड़े के लिए आरक्षण पहले से मौजूद है जिन्हें कुनबी समुदाय के नाम से जाना जाता है. मराठा कुनबी ज्यादातर खेतिहर हैं. उनकी विदर्भ और कोंकण क्षेत्र में बड़ी तादाद के साथ आबादी में 31. 5 फीसदी हिस्सेदारी है.