महाराष्ट्र में कई दिनों तक चली बातचीत के बाद मंत्रालयों के बंटवारे का नया फॉर्मूला तय हो गया है. तीनों पार्टियों के बीच मंत्रालयों को लेकर सहमति बन गई है. महाराष्ट्र सरकार में जहां नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के पास सबसे ज्यादा मंत्रालय होंगे, वहीं कांग्रेस पार्टी के पास सबसे कम. एनसीपी के पास 16 मंत्रालय, शिवसेना के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 मंत्रालय होंगे.
हालांकि कैबिनेट विस्तार पर अब तक कोई फैसला सामने नहीं आया है.सूत्रों के मुताबिक विभागों के बंटवारे का फैसला सामने आ सकता है. वैसे तो एनसीपी ने डिप्टी सीएम पद की भी मांग की है लेकिन इस पद पर कौन शपथ लेगा, इस पर किसी के नाम पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है.
माना जा रहा है कि हाल ही में देवेंद्र फडणवीस के साथ डीप्टी सीएम पद की शपथ लेकर इस्तीफा दे चुके शरद पवार के भतीजे अजित पवार उद्धव ठाकरे सरकार में डिप्टी सीएम पद मांग रहे हैं, जिस पर सहमति नहीं बन पा रही है.
इससे पहले सूत्रों का दावा था कि शिवसेना को शहरी विकास, हाउसिंग, सिंचाई और महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआरडीसी) जैसे मंत्रालय मिल सकते हैं. जबकि एनसीपी गृह, वित्त, योजना, बिजली और वन मंत्रालय जैसे पद अपने पास रख सकती है. उधर कांग्रेस को राजस्व, पीडीडब्लूडी और एक्साइज मंत्रालय मिलने की संभावना है. उद्योग, स्कूल और तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा मंत्रालय को लेकर अभी फैसला होना बाकी है.
गठबंधन फॉर्मूले के तहत एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद दिया गया है, लेकिन अब तक इस पर किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है. साथ ही उद्धव कैबिनेट का विस्तार भी अभी तक नहीं हो सका है.
चर्चा है कि मंत्रालयों को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. आज तक के साथ हुए खास इंटरव्यू में जब शरद पवार से इस मुद्दे पर जब सवाल किया गया था तो उन्होंने सीधे तौर पर शिवसेना और कांग्रेस के पाले में गेंद डाल दी.
दरअसल शरद पवार ने कहा था कि मंत्रालय को लेकर उनकी पार्टी एनसीपी और शिवसेना के बीच कोई झगड़ा नहीं है. यह कांग्रेस और एनसीपी के बीच है. पवार ने कहा कि एनसीपी के पास शिवसेना से दो सीटें कम हैं, जबकि कांग्रेस से 10 सीटें ज्यादा हैं. उन्होंने कहा, 'शिवसेना के पास मुख्यमंत्री है जबकि कांग्रेस के पास स्पीकर है. लेकिन मेरी पार्टी को क्या मिला. डिप्टी सीएम के पास कोई अधिकार नहीं होता.'