महाराष्ट्र में पंजाब एंड महाराष्ट्र को ऑपरेटिव बैंक(पीएमसी) के खाताधारकों ने मुंबई स्थित भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के खाताधारकों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. पंजाब एंड महाराष्ट्र को ऑपरेटिव बैंक में ग्राहकों का 11500 करोड़ रुपया जमा है, बैंक की ब्रांच पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली और गोवा में भी हैं.
पीएमसी बैंक की 137 शाखाएं हैं और यह देश के टॉप-10 को-ऑपरेटिव बैंकों में से एक है. पीएमसी बैंक के मैनेजमेंट ने अपने नॉन परफॉर्मिंग एसेट और लोन वितरण के बारे में आरबीआई को गलत जानकारी दी है जिसके बाद आरबीआई ने बैंक पर कई तरह की पाबंदी लगा दी है. इन पाबंदियों की वजह से खाताधारकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
कोर्ट ने सुनवाई से कर दिया था इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि उन 15 लाख लोगों को उनका पैसा वापस दिलाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए, जिनका पैसा पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपेरेटिव बैंक (पीएमसी बैंक) में घोटोल के चलते फंसा हुआ है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए कहा.
पिछले महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के तहत पीएमसी बैंक पर नियामक प्रतिबंध लगाए थे. आरबीआई ने शुरू में जमाकर्ताओं को 1,000 रुपये निकालने की अनुमति दी थी, बाद में इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया और अब बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया है, लेकिन ग्राहक अपने सभी खातों तक पूरी पहुंच की मांग कर रहे हैं.
इस बीच, कम से कम तीन मौतें हुई हैं, जिसके लिए बैंक संकट को जिम्मेदार ठहराया गया है. केंद्र की ओर से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार पीएमसी बैंक खाताधारकों की चिंता का ख्याल रख रही है और गलत करने वालों की संपत्ति कुर्क करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है.उन्होंने कहा कि 88 अचल संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है.