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सनातन संस्था पर एक्शन लेगी महाराष्ट्र सरकार, इंडिया टुडे का स्टिंग बनेगा सबूत

भले ही करीब 10 साल पहले महाराष्ट्र में हुए बम धमाकों में सनातन संस्था की भूमिका पर हाईकोर्ट में मामला चल रहा हो, लेकिन इंडिया टुडे के खुलासे के बाद केस में नया ट्विस्ट आ गया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस (फाइल, पीटीआई) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस (फाइल, पीटीआई)

महाराष्ट्र के थिएटरों के बाहर 2008 में हुए बम धमाकों में कथित भूमिका को लेकर सनातन संस्था के दो साधकों की स्वीकारोक्ति के बाद राज्य सरकार अब इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में सबूत के तौर पर पेश कर सकती है.

महाराष्ट्र सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इंडिया टुडे की ओर से किए गए खुलासे के बाद राज्य सरकार इस वीडियो को बतौर सबूत कोर्ट में पेश कर सकती है. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है.

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र के कानून और न्याय विभाग से इस बारे में जानकारी देने को कहा गया है कि कोर्ट में इसे किस तरह बतौर सबूत पेश किया जा सकता है. किसी भी संगठन पर यूएपीए के तहत बैन तभी लगाया जा सकता है जब महाराष्ट्र सरकार की ओर से यूएपीए में केस दर्ज कराया जाए. सूत्र बताते हैं कि इंडिया टुडे की ओर से किया गया खुलासा इतना दमदार है जो 2008 के मामले के दोषियों को सजा दिला सकती है.

दूसरी ओर, सनातन संस्था पर इंडिया टुडे के खुलासे के बाद गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर से जब इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने से इंकार कर दिया.

केंद्र तक ले जाएंगे मामला

सनातन संस्था पर इंडिया टुडे SIT की जांच के टीवी पर प्रसारित होते ही महाराष्ट्र सरकार हरकत में आ गई थी और उसने कार्रवाई का आश्वासन दिया था. महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने वादा किया कि वो इस मामले को केंद्र सरकार तक ले जाएंगे. केसरकर ने कहा, 'जो सबूत हमने आज देखे, हमारी सरकार कार्रवाई करेगी.' मंत्री ने इंडिया टुडे को बताया, 'अगर वो बरी कर दिए गए थे तो हम इस मामले को देखेंगे. पता लगाएंगे कि क्या उन पर कानून के तहत दोबारा एक्शन लिया जा सकता है. हम सारे सबूत केंद्र को भेजेंगे.'

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सनातन संस्था पर तत्काल प्रभाव से बैन लगाने की मांग की. चव्हाण ने कहा, 'अगर हम सनातन संस्था की पृष्ठभूमि देखें तो बड़ी स्याह तस्वीर सामने आती है. ठाणे जिले में चार हत्याएं, एक बम फैक्ट्री. ये संस्था गोवा में भी बम बनाने में शामिल रही है. हैरानी है कि कैसे ऐसे संगठनों का अस्तित्व बने रहने दिया जाता है जो सीक्रेट मर्डर सोसाइटी की तरह काम कर रहे हैं. हम ऐसे व्यक्ति को क्यों नहीं पकड़ सकते जो ट्रिगर निकालता है.'

वहीं सनातन संस्था ने अपनी गतिविधियों का निर्लज्ज बचाव करने की कोशिश की. सनातन संस्था की सहयोगी हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता रमेश शिन्दे ने साधक के कबूलनामे से जुड़े टेप्स को ही 'छेड़छाड़ से तैयार किया' बता दिया.

स्टिंग ऑपेरशन से खुलासा

महाराष्ट्र के थिएटरों के बाहर 2008 में बम धमाकों में कथित भूमिका को लेकर इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने सोमवार को स्टिंग ऑपरेशन करते हुए खुलासा किया था कि इस संस्था से जुड़े दो साधकों ने कैमरे पर खुद ही आतंकी हमलों में अपनी कथित भूमिका स्वीकार की थी.

सम्मोहन विद्या से इलाज के माहिर डॉ जयंत आठवले ने 1999 में सनातन संस्था की स्थापना की. सनातन संस्था और इसके केंद्र महाराष्ट्र, गोवा और देश के अन्य हिस्सों में भी फैले हैं. ये संस्था विवादों से अछूती नहीं है. इस संस्था को 2008 में महाराष्ट्र में थिएटर्स और सिनेमाहालों के बाहर बम धमाकों के आरोप में महाराष्ट्र ATS ने चार्जशीट में नामजद किया.

आरोप है कि सनातन संस्था ने कुछ फिल्मों और नाटकों में जिस तरह से हिन्दुत्व की छवि पेश की जा रही थी, उसे आपत्तिजनक मानते हुए कथित तौर पर ये धमाके किए. बीते कई साल से सनातन संस्था जोर देकर अपने खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करती रही है, लेकिन इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने ऐसे सबूत जुटाए जो सनातन संस्था की संभावित भूमिका की ओर इशारा करते हैं.

कैमरे पर कबूला अपराध

सात साल पहले मंगेश दिनकर निकम को ट्रायल कोर्ट ने ठाणे, पनवेल, और वाशी में 2008 में हुए बम धमाकों से जुड़े केस में बरी कर दिया था, लेकिन अब निकम ने खुद कैमरे पर कबूल किया है कि उसने विस्फोटक प्लांट किए थे.

निकम सनातन संस्था से अकेला शख्स नहीं जिसने आतंकी प्लॉट में अपनी भूमिका होना कबूल किया. 58 वर्षीय हरिभाऊ कृष्णा दिवेकर भी सनातन संस्था का अनुयाई है जिसने कबूल किया कि 2008 के बम धमाकों में उसकी ज्यादा बड़ी भूमिका थी जिसके लिए अभियोजन उसे दोषी ठहराने में नाकाम रहा.

ATS चार्जशीट के मुताबिक दिवेकर केस के दो दोषियों में से एक का बहुत करीबी रहा है. हालांकि हमलों के तीन साल बाद पर्याप्त सबूतों के अभाव में दिवेकर बरी हो गया. दिवेकर ने माना कि उसने अपने पास विस्फोटक रखे हुए थे जिसका ATS ने अपनी चार्जशीट में दर्ज ही नहीं किया.

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