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महाराष्ट्रः सुरक्षा बलों की ताबड़तोड़ कार्रवाई से सकते में आए नक्सली कमांडर

महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में एक के बाद एक बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन से नक्सलियों में खलबली मची हुई है. इन दो मुठभेड़ों में 22 नक्सलियों के मारे जाने से नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी सकते में आ गई है. अब नक्सली गढ़चिरोली से भागकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में छत्तीसगढ़ की सरहद में दाखिल होने की तैयारी में हैं. हालांकि यहां भी पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उनकी घेराबंदी शुरू कर दी है.

फाइल फोटो फाइल फोटो

महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में एक के बाद एक बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन से नक्सलियों में खलबली मची हुई है. इन दो मुठभेड़ों में 22 नक्सलियों के मारे जाने से नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी सकते में आ गई है. अब नक्सली गढ़चिरोली से भागकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में छत्तीसगढ़ की सरहद में दाखिल होने की तैयारी में हैं. हालांकि यहां भी पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उनकी घेराबंदी शुरू कर दी है.

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सरहद में हाई अलर्ट जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ के एंटी-नक्सल स्क्वाड ने नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर बातचीत की मंच पर आएं. वरना मरने के लिए तैयार रहें. राज्य के DGP एंटी-नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने नक्सलियों से कहा है कि अगर वे हथियार छोड़कर बातचीत के लिए सामने आएंगे, तो पुलिस उन पर गोली नहीं चलाएगी. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सरहद पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मिली कामयाबी से नक्सलियों की सांसे फूली हुई हैं.

वहीं, गढ़चिरोली में एक के बाद एक दो एंटी-नक्सल ऑपरेशन में 22 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने से सुरक्षा बलों के हौसले बुलंद है. इस एंटी-नक्सल ऑपरेशन का सीधा असर नक्सली कैडर पर पड़ा है. बताया जा रहा है कि गढ़चिरोली में कार्यरत एक दर्जन से ज्यादा नक्सली दल छत्तीसगढ़ के बीजापुर, भोपाल पटनम और नारायणपुर के जंगलों में दाखिल होने की तैयारी में है.

आमतौर पर नक्सली बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद एक दूसरे राज्यों में भाग जाते हैं, ताकि वे पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों से बच सकें. हालांकि इस बार गढ़चिरोली में हुए लगातार दो एनकाउंटर से नक्सलियों में खलबली मची हुई है. वे सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अब छत्तीसगढ़ की ओर कूच कर रहे हैं. हालांकि यहां भी पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उनकी घेराबंदी शुरू कर दी है. महाराष्ट्र से सटे छत्तीसगढ़ की सरहद के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की तगड़ी मोर्चाबंदी शुरू कर दी है. पूरे लाव-लश्कर के साथ जवानों ने जंगलों और गांवों में तलाशी अभियान छेड़ा हुआ है.

इन जवानों से कहा गया है कि अगर कोई नक्सली नेता आत्मसमर्पण की गुहार लगाता है, तो उसे सुरक्षित अपने कब्जे में लिया जाए. वरना गोली का जवाब गोली से दिया जाए. छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सलियों से साफ तौर पर कहा है कि बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हैं. बर्शर्ते नक्सली और उनके नेता हथियार छोड़ सामने आएं. राज्य के DGP एंटी-नक्सल ऑपरेशन  डीएम अवस्थी के मुताबिक सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन नक्सली पहले हिंसा रोकें और हथियार डालें.

उनके मुताबिक एक ओर नक्सली हिंसा करें और दूसरी ओर बातचीत....ऐसे में काम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि बातचीत से इस समस्या का हल निकल सकता है, तो इसके लिए भी हम तैयार हैं, लेकिन हथियार डाले बगैर बातचीत संभव नहीं है. छत्तीसगढ़ के बस्तर के आधा दर्जन जिलों में नक्सलियों ने आम जनता ही नहीं, बल्कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमले तेज किए हैं. पिछले तीन महीनों में नक्सलियों ने यात्री सेवा से जुड़े वाहनों के अलावा सड़क निर्माण से जुड़े वाहनों को आग के हवाले करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव और गरियाबंद में नक्सलियों ने आम लोगों को भी जान-माल का जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है. इन जिलों के कई इलाकों में नक्सली खौफ के चलते आम जनजीवन भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. नक्सलियों ने ग्रामीणों को ही नहीं, बल्कि पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को भी निशाना बनाया है. हालांकि कई मोर्चों पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी नक्सलियों पर भारी पड़े हैं, लेकिन इस खून-खराबे के बीच नक्सलियों से सीधी बातचीत की पुलिस की पहल नक्सलवाद के खात्मे को लेकर मील का पत्थर साबित हो सकती है.

छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत तमाम राजनैतिक दल भी नक्सलियों से बातचीत के रास्ते को सधा हुआ कदम बता रहे हैं. फिलहाल बातचीत को लेकर नक्सलियों की ओर से अभी कोई पहल नहीं हुई है. राज्य में नक्सलियों से सहानभूति रखने वाले कई संगठन और बुद्धिजीवी भी मौजूद है, लेकिन इस मामले में उन्होंने ने भी चुप्पी साधी हुई है.

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