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BJP-शिवसेना में कुर्सी की रेस, निर्दलीयों को साधने में जुटे दोनों दल, NCP पर नजर

महाराष्‍ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान के साथ दबाव की राजनीति जारी है. शिवसेना ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सरकार बनाने पर अड़ी है, लेकिन बीजेपी सहमत नहीं है. ऐसे में सभी की निगाहें एनसीपी पर हैं. लेकिन निर्दलीय विधायकों को बीजेपी-शिवसेना अपने साथ मिलाकर समीकरण को बनाने में जुटी हैं.

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देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे
देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे

  • महाराष्ट्र में सीएम पद के लिए रस्साकशी जारी
  • निर्दलीय MLA को मिलाने में जुटी BJP-शिवसेना
  • महाराष्ट्र में एनसीपी किंगमेकर की भूमिका में

महाराष्‍ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान के साथ दबाव की राजनीति जारी है. चुनाव नतीजे के बाद से ही शिवसेना ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सरकार बनाने पर अड़ी है. जबकि बीजेपी विधायकों के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी होने का हवाला देते हुए इस फॉर्मूले पर सहमत नहीं है. सोमवार को बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग महाराष्ट्र के राज्यपाल से मुलाकात की थी.

महाराष्ट्र में सीएम पद पर रस्साकशी के बीच बीजेपी और शिवसेना निर्दलीय विधायकों के जरिए अपने समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गई हैं. अभी तक 6 निर्दलीय विधायक दोनों दलों के समर्थन की बात कह चुके हैं. इनमें से 3 निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी और 3 ने शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है. इसके अलावा प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायक शिवसेना के साथ खड़े हैं. दबाव की राजनीति के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 30 अक्टूबर को मुंबई पहुंचने रहे हैं. माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार के गठन के फॉर्मूले को अमलीजामा पहना सकते हैं.

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बीजेपी के साथ ये निर्दलीय एमएलए

बता दें कि बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा करने वाले तीन निर्दलीय विधायकों में गीता जैन, राजेंद्र राउत और रवि राणा शामिल हैं. ठाणे जिले की मीरा भयंदर सीट से जीतीं. गीता जैन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया. विधानसभा चुनाव में ये तीनों नेता बीजेपी से टिकट चाहती थीं. ऐसा न होने पर उन्‍होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था.

गीता जैन ने बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र मेहता को हराया था. राजेंद्र राउत बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे और उन्होंने सोलापुर जिले की बरसी सीट से शिवसेना के प्रत्याशी दिलीप सोपाल को हरा दिया था. रवि राणा भी बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे और उन्होंने शिवसेना की प्रीति बंद को हराया है.

शिवसेना को 5 विधायकों का समर्थन

जबकि, शिवसेना भी अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक शंकर राव गड़ाख ने सोमवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर समर्थन देने का ऐलान किया है. इससे पहले  प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायकों ने शिवसेना को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी. इसमें अचलपुर से विधायक बाच्चु काडु और उनके सहयोगी मेलघाट से विधायक राजकुमार पटेल ने शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है. दोनों सीटें विदर्भ के अमरावती जिले की हैं.

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इसके अलावा रामटेक के विधायक आशीष जायसवाल और भंडारा के विधायक नरेंद्र भोंदेकार ने भी शिवसेना का दामन थाम लिया. ये दोनों विधायक निर्दलीय जीतकर आए हैं. इस तरह से शिवसेना के विधायकों की संख्या 61 पहुंच गई है. हालांकि बीजेपी और शिवसेना के बीच मचे घमासान में एनसीपी किंगमेकर की भूमिका में है. शरद पवार बीजेपी और शिवसेना में जिसके साथ भी खड़े हो जाएं महाराष्ट्र की उसकी सरकार बनना तय है.

बीजेपी प्रवक्ता जेपीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि महाराष्ट्र में जल्द ही बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनेगी, जो पांच साल तक चलेगी. महाराष्ट्र बीजेपी प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा कि सीएम बीजेपी का था, है और आगे भी रहेगा. हमारे साथ 15 निर्दलीय विधायक हैं. छोटे दलों के कुछ और विधायक संपर्क में हैं

एनसीपी किंगमेकर की भूमिका में

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों में 2014 के मुकाबले भाजपा की कम सीटें आने के बाद से शिवसेना ने अपना रुख कड़ा कर लिया है. शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को एक बार फिर बीजेपी को गठबंधन धर्म निभाने की याद दिलाई और कहा कि बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले को निभाना चाहिए. साथ ही उन्होंने एनसीपी के साथ जाने की अटकलों पर भी अपने पत्ते खोले और कहा कि राजनीति में विकल्प खुले रहते हैं. महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने चुनाव में 105 और शिवसेना ने 56 सीटें जीती हैं.

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