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भंडारा में बच्चों की मौत पर शिवसेना ने केंद्र को घेरा, कहा- पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का दम घुट रहा है

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि भंडारा अस्पताल में स्मोक डिटेक्टर नहीं था. इसकी जांच कराई जा रही है लेकिन मुद्दा सिर्फ भंडारा का ही नहीं है, बल्कि देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का दम घुट रहा है.

भंडारा अस्पताल में आग लगने के कारण हुई थी 10 बच्चों की मौत भंडारा अस्पताल में आग लगने के कारण हुई थी 10 बच्चों की मौत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भंडारा अस्पताल में आग लगने के कारण 10 बच्चों की मौत
  • शिवसेना बोली- पूरे देश की स्वास्थ्य सेवा का दम घुट रहा है

महाराष्ट्र के भंडारा सरकारी अस्पताल में 10 बच्चों की मौत मामले में शिवसेना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि भंडारा अस्पताल में स्मोक डिटेक्टर नहीं था, इसकी जांच कराई जा रही है, लेकिन मुद्दा सिर्फ भंडारा का ही नहीं है, बल्कि देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का दम घुट रहा है.

शिवसेना ने सामना में कहा, 'भंडारा जिले के सामान्य अस्पताल में दस नवजात शिशु आग में तड़पकर मर गए. इनमें से कई शिशुओं ने जन्म लेने के पश्चात अपनी आंखें भी नहीं खोली थीं. राज्य ही नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इस घटना के कारण सवाल खड़े हो गए हैं. हमारे वैज्ञानिकों ने कोविड पर वैक्सीन की खोज की, उस कोविड वैक्सीन का राजनीतिक उत्सव शुरू हो ही चुका है.'

शिवसेना ने कहा, 'भंडारा के सरकारी अस्पताल में तो स्मोक डिटेक्टर तक नहीं था. आग विरोधी यंत्रणा उपलब्ध नहीं थी. अस्पताल के कर्मचारी लापता थे. मुख्यमंत्री ठाकरे ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. आग शॉट-सर्किट से लगी या किसी और कारण से लगी, इसकी जांच की जाएगी. राज्य के अन्य सारे अस्पतालों के शिशु केयर यूनिट का भी ऑडिट करने का आदेश सरकार ने दिया है. लेकिन यह नींद दस शिशुओं की मृत्यु के पश्चात टूटी इसका किसी को दुख हो रहा है क्या?'

शिवसेना ने कहा, ' प्रधानमंत्री के अनुसार भंडारा की घटना हृदय विदारक है लेकिन मुद्दा सिर्फ भंडारा का ही नहीं है, बल्कि देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का दम घुट रहा है. कई गर्भवती महिलाएं रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे देती हैं..लाशों को बैलगाड़ी और हाथगाड़ी पर ले जाना पड़ता है. महाराष्ट्र जैसे ‘प्रगतिशील’ आदि कहे जानेवाले राज्यों के लिए ये ठीक नहीं है. आज भंडारा के शिशु आग के धुएं में जलकर और दम घुटने से मर गए.'

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केंद्र पर हमला बोलते हुए शिवसेना ने कहा, 'केंद्र सरकार ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया. दुख व्यक्त करके क्या होगा? थोड़ी राजनीति कम करो, चुनावी उधेड़बुन रोको और पंडित नेहरू के कार्यकाल में जिस प्रकार स्वास्थ्य व्यवस्था का काम हुआ, वैसा काम करो. ‘एम्स’ जैसी संस्था पंडित नेहरू ने ही तैयार करवाई. वैसी व्यवस्था कुछ प्रमुख शहरों में होनी चाहिए.'

 

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