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पालघर लिंचिंग पर घिरी उद्धव सरकार, BJP बोली- भीड़ में क्या कर रहे थे NCP-CPIM नेता

भीड़ में उद्धव सरकार की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेताओं के शामिल होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे लेकर उद्धव सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

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इस मसले को लेकर उद्धव ठाकरे की सरकार घिरती ही जा रही है
इस मसले को लेकर उद्धव ठाकरे की सरकार घिरती ही जा रही है

  • भीड़ में NCP और CPIM नेताओं के शामिल होने पर उठाए सवाल
  • कहा- गठबंधन सरकार चलाने का अर्थ पापों पर पर्दा डालना नहीं

महाराष्ट्र के पालघर जिले के गांव चिनचिड़े में भीड़ ने अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने पर उनको समाधि देने जा रहे दो संतों सहित तीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. संतों की लिंचिंग से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने राज्य की उद्धव सरकार से जवाब तलब किया है. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महाराष्ट्र के अपने समकक्ष उद्धव ठाकरे से बात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

इस मसले को लेकर उद्धव ठाकरे की सरकार घिरती ही जा रही है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मामले में 100 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी देते हुए कहा था कि इसे धार्मिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. लेकिन अब इस भीड़ में उद्धव सरकार की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेताओं के शामिल होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे लेकर उद्धव सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

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पात्रा ने ट्वीट कर सवाल किया है कि पालघर की उस अमानवीय भीड़ में एनसीपी और सीपीआईएम के नेता क्या कर रहे थे. उन्होंने कहा है कि आप लोग गठबंधन की सरकार चलाते हैं, इसका ये अर्थ नहीं कि एक-दूसरे के पापों पर पर्दा डालेंगे. पात्रा ने सवाल किया कि संतों की हत्या या साजिश? महाराष्ट्र सरकार को जवाब देना होगा.

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पात्रा ने यह बातें सुनील देवधर का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखी हैं. देवधर ने अपने ट्वीट में महाराष्ट्र सरकार की गठबंधन सहयोगी एनसीपी से जिला पंचायत सदस्य काशीनाथ चौधरी के भीड़ में शामिल होने का आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा है कि स्थानीय लोगों के अनुसार चौधरी के साथ सीपीएम के पंचायत सदस्य विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी मौके पर थे.

क्या है पूरा मामला?

मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में स्थित हनुमान मंदिर से जुड़े दो संत अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने की खबर पाकर गुजरात के सूरत स्थित गुरु के आश्रम के लिए निकले थे. लॉकडाउन के बीच जा रहे संतों को पुलिस ने दादरा और नगर हवेली की सीमा से लौटा दिया. लौटाए जाने के बाद संत मुख्य मार्ग छोड़कर ग्रामीण रास्ते से गुजर रहे थे कि लगभग 200 लोगों की भीड़ ने उनके वाहन पर पथराव कर दिया.

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भीड़ ने दोनों संतों को चालक के साथ वाहन से खींचकर पीट-पीटकर मार डाला. 16-17 अप्रैल की रात घटी इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब सियासी घमासान मच गया है. संतों ने भी लॉकडाउन के बाद पालघर कूच करने की चेतावनी दी है.

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