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महाराष्ट्र: आम आदमी की मदद करते हैं विधायक बच्चू काडु, खुद को कहते हैं केजरीवाल का बाप

महाराष्ट्र के अचलापुर में एक निर्दलीय विधायक जनता के लिए अगर जरूरत पड़ी तो कानून तोड़कर भी काम करते हैं. पूछने पर कहते हैं, 'जब आम आदमी को सरकारी अधिकारी तंग करेंगे तो मैं चुप नहीं रह सकता.'

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निर्दलीय विधायक बच्चू काडु
निर्दलीय विधायक बच्चू काडु

महाराष्ट्र के अचलापुर में एक निर्दलीय विधायक जनता के लिए अगर जरूरत पड़ी तो कानून तोड़कर भी काम करते हैं. पूछने पर कहते हैं, 'जब आम आदमी को सरकारी अधिकारी तंग करेंगे तो मैं चुप नहीं रह सकता.' खुद को 'अरविंद केजरीवाल का बाप' बताने वाले विधायक बच्चू काडु कहते हैं, 'मैं रोड शो करके लोगों का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहता . इससे लोगों की उर्जा बेकार की खर्च होती है.'

एक हिंदी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, बच्चू काडु अमरावती से निर्दलीय विधायक हैं. वह सिस्टम से काम करवाने के लिए अजीबो-गरीब तरीकों को अपनाते हैं. कई बार तो उन्होंने सरकारी दफ्तर में सांप भी छोड़ा है. बच्चू विकलांगों के लिए लड़ाई लड़ते हैं. बच्चू ने कहा, 'जब सरकारी अधिकारी काम नहीं करते ऐसे वक्त में कानून तोड़ना जरूरी हो जाता है. इस तरह सरकारी कर्मचारियों को खि‍लाफ मोर्चा खोलने से सबको लगता है कि यह आम आदमी का हक है और सरकारी कर्मचारियों को अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए.'

जब बच्चू से पूछा गया, क्या आप अरविंद केजरीवाल की तरह बनना चाहते हैं? तो जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं केजरीवाल का बाप हूं. मैं लोकप्रि‍य नहीं हूं, क्योंकि दिल्ली में नहीं रहता.' वह अनिल कपूर की फिल्म 'नायक' से प्रेरणा लेते हैं.

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उनके आंदोलन के बारे में पूछने पर बच्चू ने कहा, 'मैं शारीरिक रूप से अशक्त लोगों के हक की लड़ाई लड़ रहा हूं, लेकिन सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया. उन्होंने कहा, 'हमारी मांग है कि सिविक बॉडी का तीन पर्सेंट फंड विकलांगों के लिए इस्तेमाल किया जाए, जिनमें विकलांगों को दी जाने वाली पेंशन में बढ़ोतरी हो, उनके लिए जॉब और हाउसिंग स्कीम का विस्तार शामिल है. हम चाहते हैं कि सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट के तहत विकलांगों के लिए एक अलग कमिशन बनाया जाए.' बच्चू किसी पार्टी से नहीं जुड़ना चाहते हैं. उनका कहना है कि वह किसी पार्टी से जुड़कर अपनी आजादी नहीं खोना चाहते.

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