महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने गुरुवार को विधान परिषद में अपने खिलाफ लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर सफाई दी. मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि उन्होंने विपक्ष के किसी भी नेता को देशद्रोही नहीं कहा है बल्कि नवाब मलिक (Nawab Malik) को देशद्रोही बताया और विपक्ष ने उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अंडरवर्ल्ड के साथ वित्तीय लेनदेन के खुलासे के बाद भी महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार ने मलिक को कैबिनेट मंत्री के पद से नहीं हटाया. दरअसल शिंदे 26 फरवरी को विधानसभा सत्र से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए अपने बयान पर सफाई दे रहे थे.
लाया गया विशेषाधिकार प्रस्ताव
विपक्ष द्वारा सरकार के साथ चाय पार्टी न करने पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि अच्छा हुआ कि हम देशद्रोहियों के साथ चाय नहीं पी सके. इस बयान के लिए शिंदे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया गया था. उपसभापति नीलम गोरे ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव को खारिज करना स्वीकार नहीं किया है. उन्होंने कहा, 'मैं तय करूंगी कि इस प्रस्ताव को विशेषाधिकार समिति को भेजा जाना चाहिए या नहीं। हमने मुख्यमंत्री को स्पष्ट करने के लिए समय दिया, उन्होंने अपनी सफाई दे दी है.'
विपक्ष ने उठाए सवाल
एनसीपी एमएलसी शशिकांत शिंदे सहित विपक्षी नेताओं ने कहा कि शिंदे सहूलियत की राजनीति कर रहे हैं. जब एमवीए का गठन किया जा रहा था तब उन्होंने विधायकों को एक साथ लाने में मदद की और कैबिनेट में मलिक के साथ बैठे थे। एमएलसी अनिल परब ने कहा कि उन्होंने कभी भी राष्ट्र-विरोधियों का समर्थन नहीं किया और शिंदे जब एक ही कैबिनेट में मंत्री थे तब उन्होंने यह सब क्यों नहीं कहा.
शिंदे ने किया ये खुलासा
शिंदे ने कहा, 'मैंने एमवीए शासन के दौरान उद्धव ठाकरे से कहा था कि मलिक को मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए. जब संजय राठौड़ को हटाया जा सकता है तो मलिक को क्यों नहीं लेकिन वह मलिक से इस्तीफा नहीं ले सके. इन सबके चलते हमने उन्हें छोड़ दिया और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई, मैंने अजीत पवार या किसी अन्य विपक्षी नेता को राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा है.'