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कैसे डूबा Builder.ai? एआई फ्रॉड नहीं, फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आई असली वजह ये थी

रिपोर्ट के मुताबिक जोशफैन ऐप वाकई बनाया गया था. फिर डेलीहंट पर विज्ञापन अभियान चले थे. सॉफ्टवेयर और लाइसेंसिंग से जुड़ा काम हुआ. इसके सबूत में साइन किए गए एग्रीमेंट और डिलीवरी रिकॉर्ड मौजूद हैं. यानि ये कहना कि दोनों कंपनियों के बीच कोई असली काम नहीं हुआ, पूरी तरह सही नहीं है.

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Builder.ai दिवालिया क्यों हुआ: फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा.(Photo:  REUTERS/)
Builder.ai दिवालिया क्यों हुआ: फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा.(Photo: REUTERS/)

2016 में ब्रिटिश-इंडियन उद्यमी सचिन दुग्गल ने Builder.ai की शुरुआत की थी. ये एक महत्वाकांक्षी स्टार्टअप था जिसे माइक्रोसॉफ्ट और कतर इन्वेस्टमेंट फंड जैसे दिग्गज निवेशकों का साथ मिला. कुल मिलाकर कंपनी में करीब 44.5 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ. Builder.ai का मुख्यालय लंदन में था और इसके ऑपरेशन दिल्ली, बेंगलुरु, सिंगापुर, टोक्यो, दुबई और लॉस एंजेलिस तक फैले थे.

कंपनी दावा करती थी कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐप और वेबसाइट के लिए कोड तैयार करती है. इसी दावे के दम पर कंपनी की वैल्यू एक समय 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई. लेकिन मई 2025 में उस समय के सीईओ मनप्रीत रतिया ने अचानक ऐलान किया कि Builder.ai दिवालिया होने जा रही है.

उठे कई सवाल

इसके बाद कई बड़े सवाल उठे जैसे इतना बड़ा निवेश गया कहां? कंपनी की कमाई क्या थी? और Builder.ai और भारतीय कंपनी VerSe के बीच हुए कारोबार की सच्चाई क्या थी? इन सवालों के बीच आरोप लगे कि दोनों कंपनियों ने एक-दूसरे को बढ़ा-चढ़ाकर बिल दिखाए, AI के नाम पर असल में इंसानों से काम कराया गया और फर्जी बिलिंग हुई. इन आरोपों के बाद कुछ शुरुआती निवेशकों ने मुंबई की फॉरेंसिक फर्म MZM एनालिट‍िक्स से जांच कराई.

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फॉरेंसिक रिपोर्ट क्या कहती है?

इंड‍िया टुडे टीवी के पास मौजूद इस एक्सक्लूसिव फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, Builder.ai और वर्स के बीच कारोबार वास्तव में हुआ था. रिपोर्ट में 13 हजार से ज्यादा मैसेज, कॉन्ट्रैक्ट, डैशबोर्ड, स्क्रीनशॉट और थर्ड पार्टी ऑडिट दस्तावेजों की जांच की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक जोशफैन ऐप वाकई बनाया गया था. फिर डेलीहंट पर विज्ञापन अभियान चले थे. सॉफ्टवेयर और लाइसेंसिंग से जुड़ा काम हुआ. इसके सबूत में साइन किए गए एग्रीमेंट और डिलीवरी रिकॉर्ड मौजूद हैं. यानि ये कहना कि दोनों कंपनियों के बीच कोई असली काम नहीं हुआ, पूरी तरह सही नहीं है. इससे 'राउंड-ट्रिपिंग' यानी सिर्फ कागजों पर लेन-देन वाले आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.

...लेकिन अकाउंटिंग में गड़बड़ी थी

रिपोर्ट ये भी साफ कहती है कि कंपनी की अकाउंटिंग पूरी तरह ठीक नहीं थी. लेकिन ये भी सवाल उठता है कि जब इतना ऑपरेशनल सबूत मौजूद था तो दुनिया भर के बड़े मीडिया संस्थानों में बिना दस्तावेजों के विपरीत कहानी कैसे इतनी पुख्ता मानी गई?

कंपनी के भीतर गवर्नेंस की गंभीर समस्या

MZM एनालिट‍िक्स की जांच में ये भी सामने आया कि Builder.ai में निगरानी और नियंत्रण की रेखा धुंधली थी. एक निवेशक द्वारा नियुक्त बोर्ड ऑब्जर्वर, जिसके पास कोई औपचारिक अधिकार नहीं था. वो कंपनी के अहम फैसलों में गहराई से शामिल था, यहां तक कि रेवेन्यू, ऑडिट जवाब और स्टाफ से जुड़े मामलों में भी.

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एक व्हाट्सएप मैसेज में उसने Q2-24 में 7 मिलियन डॉलर की रेवेन्यू गैप पर टिप्पणी की जो आमतौर पर किसी सीएफओ की भूमिका होती है. इससे ये धारणा कमजोर पड़ती है कि सिर्फ मैनेजमेंट ही जिम्मेदार था और निवेशक पूरी तरह अनजान थे.

अंदरूनी जांच भी सवालों के घेरे में

Builder.ai की ऑडिट कमेटी की ओर से कराई गई अंदरूनी जांच को भी MZM ने अधूरी बताया. रिपोर्ट के मुताबिक कई निष्कर्ष बिना ठोस सबूत के निकाले गए. इसमें 67 GB डेटा मिला लेकिन समय की कमी बताकर पूरा रिव्यू नहीं किया गया. VerSe के प्रतिनिधियों या दोनों कंपनियों के ऑडिटर्स से बातचीत तक नहीं की गई. 

असली वजह: छिपी हुई देनदारी

फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक Builder.ai के पतन की असली वजह VerSe नहीं, बल्कि Talkdesk को देनदारी थी जिसकी जानकारी नए सीईओ को दिसंबर 2024 में ही थी. इसके बावजूद निवेशकों और कर्ज देने वालों को यह बात महीनों तक नहीं बताई गई. देर से खुलासा होने के कारण कर्ज समझौते का उल्लंघन हुआ और कर्जदाताओं ने कंपनी के खातों से पैसा निकाल लिया. यही कदम कंपनी के अचानक ढहने की मुख्य वजह बना.

निवेश का पैसा यहां खर्च हुआ-रिपोर्ट

ऑपरेशन
R&D
कर्मचारियों की सैलरी
वेंडर्स
क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
(किसी तरह की हेराफेरी या निजी इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला.)

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दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

26 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने Builder.ai के संस्थापक सचिन दुग्गल के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले कठोर कदम उठाना कानून का उल्लंघन है. दुग्गल को सिर्फ गवाह माना गया था आरोपी नहीं.

इस पूरी कहानी से एक बात साफ है कि Builder.ai का पतन सिर्फ AI या फर्जी बिलिंग की कहानी नहीं है. कहीं न कहीं ये कमजोर गवर्नेंस, देर से सामने आई देनदारी और गलत फैसलों का नतीजा है.सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब सच्चाई इतनी जटिल थी तो एकतरफा नैरेटिव इतनी आसानी से कैसे हावी हो गया?

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