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भंडारा हादसे में गई थी 10 मासूमों की जान, जांच रिपोर्ट के बाद कई अधिकारियों पर गिरी गाज

सरकार ने भंडारा जिले के सर्जन डॉक्टर प्रमोद खंडाटे,  मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अर्चना मेश्राम, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील अंबाडे, नर्स ज्योति भारस्कर को निलंबित कर दिया है. अवर सर्जन डॉक्टर सुनीला बडे का तबादला कर दिया गया है.

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हादसे में गई थी 10 बच्चों की जान (फाइल फोटोः पीटीआई)
हादसे में गई थी 10 बच्चों की जान (फाइल फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भंडारा के सर्जन समेत चार निलंबित
  • रोका जा सकता था हादसाः जांच कमेटी
  • बेबी वार्मर से निकली चिंगारी से लगी थी आग

महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में 9 जनवरी की रात लगी आग के कारण 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी. महाराष्ट्र सरकार ने जांच कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कई चिकित्सा अधिकारियों और नर्स पर कार्रवाई की गाज भी गिर गई है. सरकार ने भंडारा के सर्जन और नर्स समेत चार को निलंबित कर दिया है.

सरकार ने भंडारा जिले के सर्जन डॉक्टर प्रमोद खंडाटे,  मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अर्चना मेश्राम, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील अंबाडे, नर्स ज्योति भारस्कर को निलंबित कर दिया है. अवर सर्जन डॉक्टर सुनीला बडे का तबादला कर दिया गया है. सरकार की ओर से प्रदेश के हर जिला अस्पताल में 15 दिन के अंदर हेल्थ ऑडिट कराने का ऐलान भी किया गया है.

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि जिला योजना विकास कमेटी के माध्यम से हेल्थ इंस्टीट्यूशंस के लिए फंड के प्रावधान को लेकर भी सभी संबंधित मंत्रियों को पत्र भेजा गया है. गौरतलब है कि 9 जनवरी को भंडारा जिला अस्पताल में आग लग गई थी. इस घटना में उपचार के लिए भर्ती 10 मासूमों की मौत हो गई थी. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और गृह मंत्री ने मौके पर जाकर घटना के संबंध में जानकारी ली थी और जांच के आदेश दिए थे. जांच के लिए हेल्थ कमिश्नर डॉक्टर रामास्वामी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी.

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क्या है जांच कमेटी की रिपोर्ट में? 
 
हादसे को लेकर जांच कमेटी ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, उसमें कहा गया है कि अस्पताल स्टाफ ने तत्परता और समन्वय दिखाया होता तो हादसे को रोका जा सकता था. 50 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेबी वार्मर से निकली चिंगारी के कारण न्यू बॉर्न केयर यूनिट में आग लगी. तीन बच्चों की मौत जलने से हुई, जबकि 7 बच्चे दम घुटने के कारण मरे. वार्ड में इंस्पेक्शन के लिए न तो कोई नर्स थी, ना ही नाइट राउंड के लिए कोई डॉक्टर.

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल के कर्मचारियों की गैर मौजूदगी के कारण हादसे के बाद समय पर जरूरी कदम नहीं उठाए जा सके और हालात बेकाबू हो गए. रिपोर्ट में कमेटी ने यह भी कहा है कि स्टाफ को इस तरह के हालात से निपटने के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई है जिसके कारण हालात खराब होते गए. सूत्रों की मानें तो कमेटी ने हॉस्पिटल स्टाफ को इस तरह के हालात से निपटने के लिए ट्रेनिंग देने की सिफारिश की है.

 

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