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'शर्मनाक बयान' के बाद माफी का मरहम

जिस महाराष्ट्र में अकाल से लोग बेहाल हैं, वहां के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार जो टिप्पणी करते हैं, वो आपत्तिजनक तो है ही, बेहद शर्मनाक भी और जब बयान पर बवाल मच गया तो बड़े आराम से उसपर माफी भी मांग ली.

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जिस महाराष्ट्र में अकाल से लोग बेहाल हैं, वहां के जो टिप्पणी करते हैं, वो आपत्तिजनक तो है ही, बेहद शर्मनाक भी और जब बयान पर बवाल मच गया तो बड़े आराम से उसपर माफी भी मांग ली.

एनसीपी प्रमुख और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने पुणे में आयोजित एक सभा में कहा कि जब पानी नहीं है तो कहां से मिलेगा, बांध में पानी नहीं तो क्या करें. उन्‍होंने कहा कि भूख हड़ताल करने से पानी नहीं मिलेगा, क्या पानी-पानी करते हो. नदी में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करें.

उन्‍होंने कहा कि वह एक आदमी 55 दिन से डैम में पानी छोड़ने की मांग को लेकर अनशन कर रहा है, क्‍या उसे पानी मिला. अब पानी ही नहीं है तो क्या छोड़ें? क्या अब वहां पेशाब कर दें.

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अजीत पवार ने भी वही किया जो सियासत में होता है, पहले जनता का मजाक उड़ाया और फिर उसपर हल्के से माफी मांग ली लेकिन जब तक वो माफी मांगते, सियासत में भूचाल मच चुका था.

आम लोगों के नाम पर अपनी पार्टी की सियासत चमकाने में लगी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी अजीत पवार के बोल पर आग बबूला है. पार्टी कहती है कि ऐसे नेता को कुर्सी पर रहने का हक नहीं.


कमान से निकले तीर और जुबान से निकले शब्द भला वापस कहां आते हैं. अजीत पवार मजे-मजे में बोल गए. अब उनके सिपहसालार बयान को रफू करने में लगे हैं. बयान पर सियासत गरम है लेकिन मुश्किल ये है कि अब भी कोई आम लोगों की मुसीबतों की बात नहीं कर रहा. मुद्दों का चूल्हा जल रहा है. राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगी हैं.

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