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MP: गोपाल भार्गव के बेटे ने खुद को टिकट की रेस से किया अलग, सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट

मध्य प्रदेश में एक तरफ सभी नेता अपने बेटों- बेटियों के लिए लोकसभा टिकट की मांग कर रहे हैं तो वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव ने खुद को टिकट की दौड़ से बाहर कर लिया है

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अभिषेक भार्गव(फोटो ट्विटर)
अभिषेक भार्गव(फोटो ट्विटर)

मध्य प्रदेश में एक तरफ सभी नेता अपने बेटों- बेटियों के लिए लोकसभा टिकट की मांग कर रहे हैं तो वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव ने खुद को टिकट की दौड़ से बाहर कर लिया है.

शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट के ज़रिए अभिषेक भार्गव ने बयान दिया कि वो लोकसभा चुनाव की दावेदारी से अपना नाम वापस ले रहे हैं. अभिषेक ने लिखा कि मोदीजी और आडवाणीजी के वंशवाद के खिलाफ दिए गए बयान के बाद वो खुद को गिल्टी महसूस कर रहें हैं.

 

बता दें कि अभिषेक को उनके पिता और मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने लोकसभा टिकट का वाजिब हकदार बताया था, जिसके बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर वंशवाद का आरोप लगाते हुए बीजेपी पर जमकर वार किया था. 

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कलंक लेकर राजनीति नहीं

अभिषेक भार्गव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वो परिवारवाद का कलंक लेकर राजनीति नहीं करना चाहते. उन्होंने लिखा कि "आदरणीय मोदी जी और आडवाणी जी के वंशवाद के विरुद्ध दिए गए बयान के बाद खुद में गिल्टी महसूस कर रहा हूं". उन्होंने कहा कि इतने बड़े संकल्प को लेकर पार्टी राष्ट्रहित में एक युद्ध लड़ रही है और सिर्फ अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए उस संकल्प की सिद्धि के रास्ते में रुकावट बनूं, यह भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते मेरा स्वाभिमान, मुझे इजाजत नहीं देता.'

अभिषेक ने आगे लिखा कि बुंदेलखंड की तीन सीटें- दमोह, सागर और खजुराहो से उनका नाम पैनल में केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा गया है. मुझे इस लायक समझने के लिए बड़े नेताओं का धन्यवाद. मैं पहले ही कह चुका हूं कि परिवारवाद का कलंक लेकर राजनीति नहीं करना चाहता इसलिए अपनी दावेदारी वापस ले रहा हूं.

नेता प्रतिपक्ष ने बताया था दावेदार

बता दें कि अभिषेक के पिता मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के बड़े नेता हैं. बेटे अभिषेक के नाम की दावेदारी सबसे पहले उनके ही बयान से सामने आई थी. गोपाल भार्गव ने कहा था कि टिकट मांगना सबका अधिकार है. मेरा बेटा 14 साल से मेरी सहायता कर रहा है, युवा मोर्चे में भी अलग-अलग पदों पर रहा है. सबका अधिकार है टिकट मांगने का और मैं जहां तक मानता हूं कि संबंध के कारण किसी को टिकट से वंचित नहीं करना चाहिए, यदि वो डिजर्व करता है तो उसे टिकट मिलना चाहिए.

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गोपाल भार्गव ने कहा था कि बेटे-बेटियों के टिकट पार्टी तय करेगी, लेकिन यदि किसी अधिकारी का लड़का नौकरी करता, यदि किसी सेठ का लड़का व्यापार करता है, किसान का लड़का किसानी करता है, तो राजनीति करने वाले का बेटा, जन सेवा करता है और कई साल से वो कर रहा है तो इसी जगह क्या भीख मांगना चाहिए. 

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