शिक्षा का अधिकार देश में लागू हो चुका है, जिसके तहत स्कूल जा कर पढ़ना हर बच्चे का कानूनी हक है. सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना नहीं चाहते. वहीं प्राइवेट स्कूलों की फीस भर पाना आम आदमी के लिए आसान नहीं है.
ऐसे में झारखंड की राजधानी रांची में 1970 से एक ऐसा प्राइवेट स्कूल चल रहा है जो आज भी सिर्फ 70 रुपए की फीस में बच्चों को शिक्षित कर रहा है.
समाज के लिए कुछ करने का जज्बा
यह स्कूल है धनसिंह दास का "महात्मा गांधी स्मारक माध्यमिक विद्यालय". धनसिंह को पढ़ाई पूरी करने के बाद रेलवे में नौकरी मिली, मगर समाज के लिए कुछ करने का जज्बा उन्हें रांची ले आया. यहां आकर धनसिंह ने घरों में जाकर एक-दो बच्चों को सिर्फ तीन रुपए में ट्यूशन पढ़ाना शुरु किया. देखते ही देखते इतने बच्चे हो गए कि स्कूल खुल गया. आज 45 साल बाद भी सिर्फ 70 रुपए फीस लेकर धनसिंह दास बच्चों को पढ़ा रहे हैं. यहां बच्चों का भविष्य तो बनाया ही जा रहा है साथ ही ये सन्देश भी दिया जा रहा है की बच्चों का भविष्य संवारना सिर्फ बिजनेस नहीं है.
आसान नहीं था 45 सालों का सफर
ऐसा नहीं है की धनसिंह का 45 साल का सफर आसानी से कटा. कई परेशानियां आयीं, सबसे बड़ी परेशानी तब आयी जब किराए के घर में चल रहे स्कूल को खाली करने का आदेश हुआ. धनसिंह टूट गए, मगर जब इस बात की खबर उनके स्कूल से पास हो चुके छात्रों को लगी तो सबने आपस में चंदा इकट्ठा कर नया स्कूल ही बना दिया. इस स्कूल में कुछ ऐसे भी शिक्षक है जो कभी इसी स्कूल के छात्र थे. वहीं स्कूल के छात्रों का कहना है की इस स्कूल में सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि सामाजिक ज्ञान भी दिया जाता है. साथ ही स्कूल की फीस इतनी कम है की उनके परिजनों को उन्हें पढ़ाना बोझ नहीं लगता.