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झारखंड: बिना सुरक्षा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे अधिकारी, नदी में फंस गई गाड़ी

झारखंड के लोहरदगा जिले के अंचल अधिकारी की गाड़ी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के दौरे के दौरान नदी में फंस गई. अधिकारी बिना किसी सुरक्षा के थे. इनके साथ केवल ड्राइवर था.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में फंसी अधिकारी की गाड़ी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में फंसी अधिकारी की गाड़ी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र में फंसी अधिकारी की गाड़ी
  • अधिकारी ने महसूस की जनता की तकलीफ
  • गांववालों से लेनी पड़ गई लिफ्ट

जनता की तकलीफ समझनी हो, तो जमीन पर जाना जरूरी होता है. जब तक खुद अपनी आंखों से जनता की परेशानी को ना समझ लिया जाए, समाधान करना मुश्किल रहता है. अब झारखंड के अंचल अधिकारी ने ना सिर्फ आम जनता की मुश्किलों को समझा बल्कि वे खुद मुश्किल में फंस गए. उन्होंने उनके दर्द को अपने ऊपर ही महसूस कर लिया. ये घटना झारखंड के बहावार तलसा इलाके की है जिसे नक्सलियों से प्रभावित माना जाता है.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में फंसी अधिकारी की गाड़ी

झारखंड के लोहरदगा जिले के अंचल अधिकारी की गाड़ी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के दौरे के दौरान नदी में फंस गई. अधिकारी बिना किसी सुरक्षा के थे. इनके साथ केवल ड्राइवर था. किस्को प्रखंड का बहावार तलसा का इलाका नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है. जंगल पहाड़ों से घिरा है और सड़क और पुल के बगैर आम जनता को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है. अब इस अंचल अधिकारी ने भी खुद उस तकलीफ को महसूस कर लिया जब उनकी गाड़ी भी बीच नदी में फंस गई और उसे निकालने में पूरे दो घंटे लग गए. जब खुद अधिकारी ही ऐसी परेशानी में फंस गए, तब जाकर उन्होंने माना कि इस इलाके में पुल-पुलिया की काफी जरूरत है.

अधिकारी ने महसूस की जनता की तकलीफ

अंचल अधिकारी बुडाय सारु ने घटना के बारे में कहा है कि दूरदराज का क्षेत्र है. दुर्गम स्थान में लोग रहते हैं. पुल यहां नहीं है. जैसा है वैसे ही परिस्थिति में हम जा रहे हैं और जाने के क्रम में मेरी गाड़ी नदी में फंस गई. अब क्योंकि अधिकारी को तो अपने काम पर जाना ही था. ऐसे में गाड़ी को छोड़ उन्हें बाइक पर किसी स्थानीय निवासी से लिफ्ट लेनी पड़ गई. जानकारी मिली है कि इस क्षेत्र में कूप में मजदूर के दब जाने की सूचना अधिकारियों को मिली थी. इसके बाद ही अंचल अधिकारी खुद मौके पर जाना चाहते थे. लेकिन वे समय रहते पहुंच पाते उससे पहले ही उनकी गाड़ी नदी में फंस गई और उन्हें गांववालों की मदद से गाड़ी को धक्का लगवाना पड़ गया.

अब ये एक ऐसी घटना है जहां पर अधिकारी को तकलीफ तो हुई लेकिन उन्हें जनता के असल मुद्दों का भी अहसास हो गया. उन्हें भी पता चल गया कि इस नक्सल प्रभवित क्षेत्र में कई बार लोगों को कितना लंबा रास्ता तय करना पड़ता है.

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