scorecardresearch
 

झारखंड के तमाड़ में सोने की तलाश में खुदाई करा रही सरकार

झारखंड के तमाड़ इलाके ने 1848 के मशहूर कैलिफोर्नियन गोल्ड रश की यादें ताजा कर दी हैं. जियोलॉजिकल सर्वे में तमाड़ के परसा गांव में बड़े पैमाने पर सोने का भंडार होने का पता चला है. इसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है.

भंडार की कीमत हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है भंडार की कीमत हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है

झारखंड के तमाड़ इलाके ने 1848 के मशहूर कैलिफोर्नियन गोल्ड रश की यादें ताजा कर दी हैं. जियोलॉजिकल सर्वे में तमाड़ के परसा गांव में बड़े पैमाने पर सोने का भंडार होने का पता चला है. इसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है.

उत्साहित भारत सरकार के जियोलॉजिकल सर्वे विभाग ने तमाड़ के दूसरे इलाकों में भी सोने की तलाश का काम तेज कर दिया है. करीब डेढ़ सदी पहले दुनिया भर के कारोबारियों और व्यापारियों ने कैलिफोर्निया का रुख किया था, जहां साल 1848 में खुदाई के दौरान बड़े पैमाने पर सोना मिला था. यह घटना बाद में 'कैलिफोर्नियन गोल्ड रश' के नाम से इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई था.

सोने की मात्रा और गुणवत्ता का अभी पता नहीं
झारखंड के तमाड़ इलाके का परसा गांव बहुत जल्द विश्व के मानचित्र पर सोने के अकूत भंडार की वजह से दर्ज हो जा सकता है. हालांकि यहां मिलनेवाले सोने की मात्रा और गुणवत्ता का पता अभी चल नहीं पाया है, लेकिन जियोलॉजिस्ट का मानना है की अब तक टेस्ट के जो नतीजे सामने आए हैं, उसके मुताबिक यहां मिलने वाला सोना उच्च कोटि का है.

15 सालों से जियोलॉजिकल विभाग कर रहा है काम
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के उप-महानिदेशक के मुताबिक, भूतत्व सर्वेक्षण विभाग इस इलाके में पिछले 15 वर्षो से काम कर रहा है और परसा गांव के पास मिले सोने की रिपोर्ट वे सरकार को भेज चुके हैं.

1 लाख टन सोने का भंडार मौजूद
अब तक की खुदाई से मिले प्रमाणों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि तमाड़ इलाके की धरती के भीतर करीब एक लाख टन सोने भंडार मौजूद हैं, जिसकी कीमत बाजार में हजारों करोड़ की है. वैसे अधिकारियों के मुताबिक, दलमा पहाड़ी सीरीज में ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से स्वर्ण कण ऊपर आए और एक पट्टी पर फैले हुए हैं.

नदियां भी उगलती हैं सोना!
झारखंड की नदियां भी सोना उगलती हैं. जमशेदपुर जिले से होकर बहनेवाली एक नदी का नाम अपनी धाराओं में सोने के कण समेटे रहने की वजह से स्वर्णरेखा पड़ गया है. आज भी इस नदी के किनारे बसने वाले दसियों गांवों के लोग अपनी आजीविका के लिए इस नदी पर आश्रित है, जिनका काम नदी में मछली पकड़ने से लेकर सोना निकालने तक का है. झारखंड की जीवनदायनी कही जाने वाली स्वर्णरेखा नदी से हर सुबह पुरुषों का काम जहां मछली पकड़ना होता है, वहीं महिलाएं नदी से सोना निकालने के काम के लिए निकल पड़ती हैं.

दिनभर की मेहनत के बाद निकलता है पारा
दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद महिलाओं को ऐसा सोना मिलता है, जो अपने साथ कई अशुद्धियों को समेटे रहता है, जिसे दूर करने के लिए इसमें पारा मिलाकर तेज आंच में गर्म किया जाता है. पारे के वाष्पीकृत होकर उड़ जाने के बाद पात्र से मिलता है शुद्ध सोने का कण, जो सरसो के दाने की तरह होता है और जिसकी शुद्धता लगभग 22 कैरेट की होती है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें