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मॉब लिंचिंग: विसरा रिपोर्ट में खुलासा, दिल का दौरा पड़ने से हुई थी तबरेज की मौत

विसरा रिपोर्ट के मुताबिक तबरेज अंसारी ने जहर नहीं खाया था, लेकिन दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ने से उसकी मौत हो गई. पिछले महीने 17 जून को बाइक चोरी में हाथ होने की आशंका के चलते लोगों के एक समूह ने अंसारी को पीटा और उनसे 'जय श्री राम' का नारा लगाने को कहा था.

तबरेज अंसारी (तस्वीर- ट्विटर) तबरेज अंसारी (तस्वीर- ट्विटर)

झारखंड में बाइक चोरी करने के संदेह में बेरहमी से पीटे गए तबरेज अंसारी की मौत ब्रेन हैमरेज या जहर से नहीं, बल्कि दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. इस बात का खुलासा तबरेज अंसारी की विसरा रिपोर्ट में हुई है. इस रिपोर्ट ने प्रशासन को हैरानी में डाल दिया है, क्योंकि तबरेज की मौत का कारण पहले ब्रेन हैमरेज बताया गया था. हालांकि, उसके बाद आए डॉक्टर की रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी मौत जहर खाने से हुई है.

विसरा रिपोर्ट के मुताबिक तबरेज अंसारी ने जहर नहीं खाया था, लेकिन दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ने से उसकी मौत हो गई. पिछले महीने 17 जून को बाइक चोरी में हाथ होने की आशंका के चलते लोगों के एक समूह ने अंसारी को पीटा और उनसे 'जय श्री राम' का नारा लगाने को कहा था.

घटनास्थल से उनके दो साथी भागने में कामयाब हो गए थे, जिन्हें पुलिस अभी तक खोज नहीं पाई है. मारपीट की घटना के एक हफ्ते बाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. उनकी हत्या के मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

प्रशासन के लिए विसरा रिपोर्ट को पचा पाना मुश्किल लग रहा है. वे एक बार फिर से जांच के लिए कार्डियोलॉजिस्ट और एमजीएम व अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट्स की एक नई उच्च-स्तरीय समिति का गठन करने पर विचार कर रहे हैं.

झारखंड हाईकोर्ट ने 17 जून को सरायकेला खरसावां में भीड़-भाड़ और 5 जुलाई को भीड़-विरोधी रैली रैली के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. अदालत ने सरकार को फटकार भी लगाई थी. सरकार ने कहा था कि सिविल सर्जन और कई अन्य लोगों सहित गलत अधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की गई थी. लेकिन इसके विपरीत, विसरा रिपोर्ट ने प्रशासन और अधिकारियों के सभी दावों को गलत साबित कर दिया है.

झारखंड में विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए विसरा रिपोर्ट का मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि जब भुखमरी के कारण कोई मौत होती है तो सरकार दावा करती है कि यह एक बीमारी के कारण हुआ और जब कोई व्यक्ति सरकारी उदासीनता के कारण स्वयं को फांसी देता है तो वह व्यक्तिगत समस्या के कारण होता है. अब जब भीड़ ने पीटकर मौत के घाट उतार दिया तो सरकार कह रही है कि यह दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई.

पुलिस पर भी सवाल

इससे पहले पुलिस के एक सूत्र ने बताया था, 'जांच के दौरान यह पाया गया है कि तबरेज अंसारी को बचाने के लिए दो थानों के प्रभारी अधिकारी ने समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी. स्थानीय ग्राम प्रधान ने पुलिस को घटना के बारे में देर रात 2 बजे सूचित किया, लेकिन वे 6 बजे घटनास्थल पर पहुंचे.'

सूत्र के मुताबिक, 'जिन डॉक्टरों ने तबरेज का इलाज किया, उन्होंने ठीक से नहीं जांचा. एक्स-रे रिपोर्ट में उनकी सिर की हड्डी टूटी हुई पाई गई लेकिन ब्रेन हैमरेज के लिए उनका इलाज नहीं किया गया. उन्हें जेल भेज दिया गया.'

अंसारी की हत्या को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी. अदालत ने 5 जुलाई के विरोध प्रदर्शन पर नाखुशी जाहिर करते हुए अंसारी की मॉब लिंचिंग के मामले में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन पर भी एक रिपोर्ट मांगी थी.

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