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PM मोदी की महात्वाकांक्षी आयुष्मान योजना में सेंधमारी, झारखंड के इस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड

झारखंड के इस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड करने के बाद अब यहां नए मरीजों को भर्ती करने पर भी रोक लगा दी गई है. पुराने जो भी मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उन्हें भी एक सप्ताह तक का समय दिया गया है. इसके बाद अस्पताल को अगले आदेश तक बंद कर दिया जाएगा. साथ ही अस्पताल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

प्रतीकात्मक चित्र  (फोटो-इंडिया टुडे) प्रतीकात्मक चित्र (फोटो-इंडिया टुडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झारखंड के एक निजी अस्पताल का मामला
  • आयुष्मान योजना के तहत इलाज में भी ले रहे थे रुपये
  • अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड, लगा जुर्माना

झारखंड के सरायकेला जिले में एक निजी अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया. अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों से भी रुपये लिए जा रहे थे. अस्पताल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अस्पताल को चलाने का लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित रहेगा. 

बता दें कि आयुष्मान योजना में समाज के कमजोर वर्ग को लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है.  इसके तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है. यानी कि अगर आयुष्मान योजना का लाभ उठाने वाला व्यक्ति बीमार होता है तो उसका 5 लाख तक का इलाज अस्पताल में मुफ्त किया जाएगा. ये प्रधानमंत्री की महात्वाकांक्षी योजना है. पीएम इसका बार बार जिक्र करते हैं. 

शनिवार को सरायकेला के आदित्यपुर स्थित मेडिट्रिना अस्पताल का लाइसेंस स्वास्थ्य विभाग की ओर से सस्पेंड कर दिया गया. अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों से भी रुपये लिए जाने की शिकायत की गई थी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिकायत की जांच की गई और जांच में पुष्टि के बाद मेडिट्रिना अस्पताल के लाइसेंस को सिविल सर्जन ने सस्पेंड कर दिया. 

लाइसेंस सस्पेंड के बाद अब इस अस्पताल में नए मरीजों को भर्ती करने पर भी रोक लगा दी गई है. पुराने जो भी मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उन्हें भी एक सप्ताह तक का समय दिया गया है. इसके बाद अस्पताल को अगले आदेश तक बंद कर दिया जायेगा. साथ ही अस्पताल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

इस संबंध में जिले के सिविल सर्जन डॉ. हिमांशु ने कहा कि मेडिट्रिना अस्पताल के बारे में पहले से ही शिकायतें मिल रही थीं. इस बार मरीजों से शिकायत मिलने पर उन्होंने इसकी खुद जांच की. इसके बाद ही अस्पताल पर क्लिनिकल एस्टेबलिस्मेंट एक्ट के तहत कार्रवाई की गई. डॉ. हिमांशु ने कहा कि जांच के दौरान अस्पताल में कई खामियां पाईं गईं.

पूर्व में खामियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिया गया था, लेकिन उसका अनुपालन नहीं किया गया. अस्पताल को चलाने का लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित ही रहेगा.

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