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झारखंड: मनरेगा में सामने आया पुराना घोटाला, सरकार बोली नहीं सहेंगे भ्रष्टाचार

झारखंड के एक जिले में साल 2013-14 में मनरेगा में घोटाले की बात सामने आने के बाद राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है. केंद्र और राज्य सरकारों ने साफ किया है कि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता बरती जाएगी.

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झारखंड में बड़ी संख्या में लौट रहे प्रवासी मजदूर (तस्वीर-PTI)
झारखंड में बड़ी संख्या में लौट रहे प्रवासी मजदूर (तस्वीर-PTI)

  • झारखंड में बड़ी संख्या में लौट रहे प्रवासी मजदूर
  • 5 लाख प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत मिलेगा काम
कोरोना वायरस संकट और देशव्यापी लॉकडाउन के बीच अपने राज्यों को लौटे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा स्कीम के तहत बड़ी संख्या में रोजगार मिल रहा है. झारखंड में भी सरकार 5 लाख प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में काम मिल रहा है.

देशव्यापी संकट के बीच मनरेगा स्कीम में घोटाले की खबरें सामने आ रही हैं. घोटालों ने राज्य सरकार की एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. झारखंड के चतरा जिले में मनरेगा में आर्थिक घोटाले की बात सामने आई है.

साल 2013-14 में 25 लाख से अधिक की निकासी के बावजूद कोई काम नहीं हुआ है. कई काम केवल कागजों पर ही दिख रहा है. कुछ काम मशीनों के जरिए किए गए लेकिन सरकारी फंड का पूरा इस्तेमाल कर लिया गया.

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चतरा जिले में सामने आए घोटाले के बाद अब पूरे राज्य में मनरेगा स्कीम पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. दोनों सरकारों ने दावा किया है कि मनरेगा पर में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता बरती जाएगी. हम धारणा बदलेंगे. जो प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों से लौटे हैं, उन्हें बड़ी संख्या में रोजगार दिया जा रहा है.

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन ने बड़ी संख्या में उद्योग धंधों को ठप कर दिया है. बड़ी संख्या में काम पर लगे प्रवासी मजदूरों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया. लोग अपने गृह राज्यों की ओर लौट गए. झारखंड में भी बड़ी संख्या मे प्रवासी मजदूर लौटे हैं.

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मजदूरों को मनरेगा स्कीम और अन्य कई योजनाओं के तहत काम दिया जा रहा है. ऐसे में अगर मनरेगा स्कीम में भी अनियमितताओं की खबरें सामने आएंगी तो जाहिर तौर मजदूरों के लिए आजीविका संकट पैदा होगा.

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