scorecardresearch
 

डिसीजन लेने में फेसबुक ने की मदद, अनाथ लड़की को BDO ने लिया गोद

फेसबुक पर यारी-दोस्‍ती और बनते-बिगड़ते रिश्‍तों की कहानी तो आपने बहुत सुनी होगी, लेकिन झारखंड में एक BDO ने जिस तरह से फेसबुक का उपयोग किया, उसने इस सोशल साइट की महत्ता को बढ़ाने का काम किया है.

X
Symbolic Image
Symbolic Image

हाल ही में अपना 10वां बर्थडे सेलिब्रेट कर चुके फेसबुक को लेकर भले ही हमारी अलग-अलग धारणा हो. लेकिन एक बात तो तय है कि सही इस्‍तेमाल किया जाए तो इसके अनेक लाभ हैं. फेसबुक पर यारी-दोस्‍ती और बनते-बिगड़ते रिश्‍तों की कहानी तो आपने बहुत सुनी होगी, लेकिन झारखंड में एक BDO ने जिस तरह से फेसबुक का उपयोग किया, उसने इस सोशल साइट की महत्ता को बढ़ाने का काम किया है.

10वीं की परीक्षा देने जा रही 14 साल की उषा की यह कहानी आपको किसी फेयरी टेल का अनुभव दे सकती है. लेकिन इस बार परी के हाथों में जादू की छड़ी नहीं बल्कि उंगलियों के नीचे फेसबुक स्‍टेटस है.

प्रदेश के बोकारो जिले में चन्द्रपूरा के कुरुंबा गांव की उषा कुमारी के सिर से तीन साल पहले माता-पिता का साया उठ गया. तब उसकी उम्र 11 साल थी. उषा के पालन-पोषण की जिम्‍मेदारी उसकी बुआ पर आई, लेकिन गरीबी के कारण घर में खाने की किल्‍लत होने लगी. घर की माली हालत देख उषा ने पास-पड़ोस के मवेशियों को चराने का काम संभाल लिया.

पढ़ना और पढ़ाई का सपना
उषा को पढ़ने-लिखने का शौक था, इसलिए वह इस दौरान भी गांव के स्‍कूल जाती रही. लेकिन जब बात मैट्रिक परीक्षा की आई तो आवेदन के लिए पैसों की कमी ने उषा के सपनों को चूर-चूर कर दिया. घर की माली हालत देख उषा यह फैसला ले चुकी थी कि अब वह आगे नहीं पढ़ पाएगी, लेकिन एक आखिरी कोशिश के रूप में उसने इलाके के BDO पवन कुमार महतो से मदद मांगने की सोची.

मुलाकात की आस और निराशा
 जब उषा BDO से मिलने पहुंची तो वह काम में व्यस्त थे. उन्होंने उषा को बाहर बैठने को कहा, लेकिन काम के बोझ के कारण वह इसे भूल गए. देर होने के कारण निराश उषा वापस घर लौट गई. वहीं, जब BDO पवन कुमार घर के लिए निकले तो उनके सह-कर्मियों ने उन्‍हें बताया कि वह अनाथ लड़की उनसे मुलाकात की आस में आंसू लिए घर लौट गई.

पवन कुमार बताते हैं कि इस वाकये ने उन्‍हें अंदर तक हिला कर रख दिया. पवन कुमार के मुताबिक उन्होंने उषा को सरकारी सहायता देने के लिए संबंधित सभी योजनाओं को खंगाला, लेकिन उषा की उम्र इसमें बड़ी बाधा बनकर आई.

परेशानी, चिंता और फेसबुक की एंट्री
पवन बताते हैं कि उषा की मदद का विचार उन्‍हें लगातार परेशान कर रहा था, ऐसे में उन्होंने अपने विचारों को फेसबुक पर पोस्ट कर दिया. वह कहते हैं, 'महज कुछ ही घंटों में मुझे सैकड़ों कमेंट्स मिले. इनमें कई दोस्‍तों ने उषा को गोद लेने की सलाह दी. मैंने भी विचार करने के बाद गोद लेने का फैसला किया.'

...और पलट गई उषा की किस्‍मत
पवन के उषा के गोद लेने के फैसले को फेसबुक पर उनके कई दोस्‍तों ने सराहा और इस नेक काम को जल्‍द कर डालने की सलाह दी. आज पवन कुमार अपने फैसले से बहुत खुश हैं. वह कहते हैं कि इससे काफी तसल्ली मिली है. अब उषा के भविष्य की चिंता दूर हो गई है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें