हेमंत सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है. पाकुड़ सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आलमगीर आलम ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया है.
जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन ने 81 सीटों की प्रदेश विधानसभा में कुल 47 सीटों पर कब्जा जमा लिया है. जेएमएम को 30, कांग्रेस को 16 जबकि आरजेडी को एक सीट पर जीत मिली है.
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पाकुड़ की विधानसभा सीटें-
1. लिटिपाड़ा: इस विधानसभी सीट पर 20 दिसंबर को वोटिंग हुई थी. यहां से झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिनेश विलियम मरांडी और बीजेपी के दानिएल किस्कू के बीच मुकाबला रहा. दिनेश विलियम ने 66675 वोटों के साथ जीत हासिल की.
2. पाकुड़: इस सीट पर भी पांचवें चरण में मतदान हुआ था. यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार आलमगीर आलम और बीजेपी के प्रत्याशी वेणी प्रसाद गुप्ता के बीच मुकाबला देखने को मिला. हालांकि कांग्रेस के आलमगीर ने जीत हासिल की, उन्हें 128218 वोट मिले.
3. महेशपुर: इस सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा से स्टीफन मरांडी ने 89197 वोटों के साथ जीत हासिल की. यहां पांचवें चरण में चुनाव हुआ था.
पाकुड़ के बारे में-
राजमहल की पहाड़ियों से घिरा है पाकुड़ जिला. ब्रिटिश राज में 1857 में हुई देश में आजादी की पहली लड़ाई से पहले 1855 में ही यहां पर संथालों का हूल (आजादी का आंदोलन) हुआ था. कहते हैं कि इस इलाके में चंद्रगुप्त मौर्य के राजवंश की कड़ियां मिलती हैं. चीनी तीर्थयात्री ह्यूएन त्सियांग ने इसका जिक्र अपने यात्रा वृतांत में भी किया है. 1592 के बाद बंगाल की राजधानी के रूप में राजमहल की स्थापना की गई. बाद में अंग्रेजों ने जब बंगाल के बीरभूम जिले को नियंत्रित किया तो राजमहल भी उसी शासन में चला गया.
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अंग्रेजों से संथालों के बीच हुए संघर्ष का आखिरी अवशेष है मार्टले टावर. इस संघर्ष में सिद्धू, कान्हो, चांद और भैरब के नेतृत्व मे दस हजार संथालों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था. 1981 में संथाल परगना को चार जिलों में विभाजित किया गया. दुमका, देवघर, गोड़्डा और साहिबगंज. साहिबगंज के एक हिस्से को मिलाकर 1994 में पाकुड़ को जिला बनाया गया.
विपक्षी महागठबंधन का किला
पाकुड़ में 2005 में कांग्रेस के आलमगीर आलम विधायक चुने गए थे. इन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के अकील अख्तर को 18066 वोटों से हराया था. 2009 में झामुमो के अकील अख्तर विधायक बन गए. लेकिन 2014 में अचानक राजनीतिक बदलाव हो गया. कांग्रेस से विधायक रहे आलमगीर आलम ने झारखंड मुक्त मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए.
साक्षरता दर 48.82 फीसदी है
2011 की जनगणना के अनुसार पाकुड़ जिले की आबादी 900,422 है. इनमें से 452,661 पुरुष और 447,761 महिलाएं हैं. जिला औसत लिंगानुपात 989 है. जिले की 7.5 फीसदी आबादी शहरी और 92.5 फीसदी ग्रामीण इलाकों में रहती है. जिले की साक्षरता दर 48.02 फीसदी है. पुरुषों में शिक्षा दर 45.73 फीसदी और महिलाओं में 32.58 फीसदी है.
पाकुड़ का जातिगत गणित
अनुसूचित जातिः 28,469
अनुसूचित जनजातिः 379,054
जानिए...पाकुड़ में किस धर्म के कितने लोग रहते हैं
हिंदूः 410,127
मुस्लिमः 322,963
ईसाईः 75,865
सिखः 356
बौद्धः 283
जैनः 222
अन्य धर्मः 88,760
जिन्होंने धर्म नहीं बतायाः 1,846
पाकुड़ में कामगारों की स्थिति
पाकुड़ की कुल आबादी में से 404,584 लोग किसी न किसी तरीके के रोजगार से जुड़े हैं. इनमें से 62.3 फीसदी लोग या तो स्थाई रोजगार में हैं या साल में 6 महीने या उससे ज्यादा दिन कमाई करते हैं.
मुख्य कामगारः 252,017
किसानः 68,549
कृषि मजदूरः 57,797
घरेलू उद्योगः 13,965
अन्य कामगारः 111,706
सीमांत कामगारः 152,567
जो काम नहीं करतेः 495,838
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत
यहां पर सिद्धो-कान्हो पार्क है, जहां पाकुड़ के लोग पिकनिक मनाने आते हैं. यहां पर अंग्रोजों से संथालों के संघर्ष की कहानियों को चित्रों-मूर्तियों आदि के जरिए दिखाया गया है.