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BJP की प्रचंड जीत से क्या झारखंड में खंड-खंड हो जाएगा महागठबंधन?

लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार के बाद महागठंबधन बिखरता हुआ नजर आ रहा है. विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के तीन बड़े पार्टनर कांग्रेस, जेएमएम और जेवीएम अपने-अपने राग अलाप रहे हैं.

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झारखंड में महागठबंधन: JMM नेता हेमंत सोरेन और कांग्रेस के अजय कुमार (फाइल-फोटो)
झारखंड में महागठबंधन: JMM नेता हेमंत सोरेन और कांग्रेस के अजय कुमार (फाइल-फोटो)

लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के विजय रथ को झारखंड में रोकने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मिलकर महागठबंधन बनाया. इसके बावजूद बीजेपी के हाथों करारी हार का मुंह देखना पड़ा. अब चंद महीनों के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन बिखरता हुआ नजर आ रहा है. सूबे में महागठबंधन के तीन बड़े पार्टनर कांग्रेस, जेएमएम और जेवीएम अपने-अपने राग अलाप रहे हैं, ऐसे में इनके एक साथ लंबे समय तक रहने पर संशय बरकरार है.

झारखंड में लोकसभा चुनाव की हार से अभी महागठबंधन बाहर भी नहीं निकल पाया कि उसके अंदर विवाद की जमीन तैयार होने लगी है. कांग्रेस राज्य में हार की समीक्षा के लिए मंथन कर गठबंधन से नफा-नुकसान का आकलन कर रही है. सूबे में महागठबंधन बनाने के बाद भी कांग्रेस महज एक लोकसभा सीट जीत सकी और उसे 15.63 फीसदी वोट मिले हैं.

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कांग्रेस ने मांगी रिपोर्ट

झारखंड के कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह के नेतृत्व में पिछले दिनों पार्टी के जिला अध्यक्षों की बैठक हुई. इसके बाद राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन हो या नहीं, इसके लिए रिपोर्ट मांगी गई है. 15 दिन के अंदर अपने-अपने क्षेत्र की जमीनी हकीकत तैयार कर रिपोर्ट सौंपनी है. इसी के बाद कांग्रेस तय करेगी कि वह 'एकला चलो' की राह अपनाएगी या फिर गठबंधन के फॉर्मूले पर चुनावी मैदान में उतरेगी.

क्या चाहती है झारखंड मुक्ति मोर्चा

जबकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा लोकसभा चुनाव में महज एक सीट जीत सकी थी और उसे 11.51 फीसदी वोट मिले थे. अब जेएमएम अध्यक्ष हेमंत सोरेन विधानसभा चुनाव के लिए सहयोगी दलों के साथ अभी से ही सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लेना चाहते हैं. झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से जेएमएम 40 सीटों की मांग कर रही है. 2014 के विधानसभा चुनाव में जेएमएम 19 सीटें जीती थी.

असमंसज में झारखंड विकास मोर्चा

महागठबंधन में तीसरे पार्टनर के रूप में झारखंड विकास मोर्चा है, जो विधानसभा चुनाव में जेएमएम के नेतृत्व में उतरने को लेकर असमंजस में है. सूत्रों की मानें तो जेवीएम के अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी किसी भी सूरत में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनावी मैदान में नहीं उतरना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि किसी को प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ने से गठबंधन को नुकसान हो सकता है.

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कई सीटों पर फंसा है पेंच

महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर भी पेंच फंसे हुए हैं. प्रदेश की घाटशिला, गांडेय, जामताड़ा, पांकी और विश्रामपुर विधानसभा सीट ऐसी हैं, जहां जेएमएम और कांग्रेस दोनों की बराबर की दावेदारी है. ऐसे में इन सीटों पर सहमित बनना मुश्किल हैं. इसके अलावा संथाल परगना की कई सीटें हैं जहां जेएमएम और जेवीएम के बीच मामला उलझा हुआ है. साथ ही हटिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस और जेवीएम के बीच भी सहमति बनाना होगा.

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