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फोन नंबर लड़कों को देने की वजह से ले ली सहेली की जान, डेढ़ किलोमीटर कंधे पर लादकर ले गए शव

सोनी का कुसूर इतना था कि उसने इंटर की छात्रा का मोबाइल नंबर कुछ लड़कों को दे दिया था. लड़के बार-बार उसके मोबाइल पर फोन करते थे.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लड़कों को दे दिया सहेली का नंबर
  • पेशेवर अपराधी की तरह कर दी हत्या
  • झारखंड के दुमका जिले की घटना

झारखंड के दुमका जिले के रसिकपुर मोहल्ले में स्थित एक लॉज में रहकर पढ़ाई करने वाली नौवीं कक्षा की छात्रा 14 वर्षीय सोनी कुमारी की जान लेने से पहले हत्यारों ने शव को ठिकाने लगाने की पेशेवर अपराधी की तरह तैयारी की थी. सोनी का कुसूर इतना था कि उसने इंटर की छात्रा का मोबाइल नंबर कुछ लड़कों को दे दिया था. लड़के बार-बार उसके मोबाइल पर फोन करते थे.

इसी बात पर दोनों में कहासुनी हुई और छात्रा ने हत्या कराने की ठान ली. सोनी ने पिता को फोन कर छात्रा की शिकायत की थी. यहां तक कहा था कि वह उसके साथ कुछ भी करा सकती है. इसके बाद साजिश के तहत सहेली ने पहले अपने प्रेमी सचिन यादव की जन्मदिन के बहाने रसिकपुर में सिकंदर मंडल के लाज में सोनी को ले गई. यहां पर पहले से सचिन के साथ उसका साथी पालोजोरी निवासी रियाज अंसार भी मौजूद था. छात्रा के इशारे पर सचिन और रियाज ने मिलकर सोनी का गला दबाकर मार डाला.

शव को लाज में ही छोड़कर दोनों रेलवे ट्रेक पार कर बलिया डंगाल जंगल में गए. यहां पर करीब तीन फीट का गडढा खोदने के वापस लाज आ गए. रात को शव के हाथ पैर बांधा और एक बोरी में लेकर चले गए. शव को बैठी मुद्रा में ही दफना दिया. दोनों आरोपित ने पुलिस को बताया कि छात्रा के कहने पर ही सोनी की हत्या की साजिश रची.

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डेढ़ किलोमीटर कंधे पर लादकर ले गए शव
सोनी की हत्या करने के बाद हत्यारों ने उसके गर्दन से लेकर दोनों हाथ और पैर इस तरह से बांध दिए थे कि पांच फुट लंबी सोनी की लंबाई घटकर तीन फीट रह गई. शव को एक बोरी में बंद कर दोनों वाडंगाल के रास्ते कंधे पर लादकर ले गए. इसके लिए रात का समय चुना. रात में इस इलाके में सन्नाटा रहता है. शव को ट्रेक तक लेकर आए और फिर मिलकर रेलवे लाइन को पार कर जंगल में ले गए. जिस जगह शव दफनाया, वहां से दोनों युवक के लाज की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है.

सच निकला पिता का बयान
दस जुलाई को पिता सुबोध कापरी ने नगर थाना में आवेदन देकर सोनी के साथ में लाज में रहने वाली इंटर की छात्रा पर अपहरण का आरोप लगाया था. पुलिस ने शक के आधार पर उसे बुलाकर पूछताछ की. छात्रा ने स्वीकार किया कि उसने ही सोनी को बाइक सवार दो युवकों के साथ जाते देखा था. उसके बाद वहां गई, नहीं मालूम. पुलिस मामला प्रेम प्रसंग का मानकर बरामदगी का प्रयास करती रही. बरामदगी नहीं होने पर 16 जुलाई को सुबोध ने पत्नी सुमन देवी के साथ एसपी कार्यालय के बाहर धरना दिया. 

एसडीपीओ नूर मुस्तफा अंसारी ने बरामदगी के लिए तीन दिन का समय लेकर धरना समाप्त कराया. इसके बाद पुलिस रेस हुई. लाज के बाहर सीसीटीवी नहीं मिला. लेकिन रसिकपुर तालाब क समीप एक सीसीटीवी में दोनों सहेली एक साथ नौ जुलाई की दोपहर जाते हुए दिखाई दी. इसके बाद पुलिस ने छात्रा को फिर से थाने बुलाकर पूछताछ की तो उसने सारी सच्चाई उगल दी.

लाश को ढूंढने के लिए पुलिस को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत
रविवार को रात में हिरासत में आने के बाद पुलिस दोनों युवकों को घटनास्थल पर ले गई. सोमवार की सुबह थाने के सहायक अवर निरीक्षक ने फिर जाकर घटनास्थल देखा. दोपहर करीब 12 बजे पुलिस दोनों आरोपित को लेकर स्थल के लिए रवाना हुई. पोलीटेक्निक कालेज से कुछ दूर एसडीपीओ नूर मुस्तफा अंसारी, सीओ यामुन रविदास व थाना प्रभारी देवव्रत पोददार को वाहन छोड़कर पैदल आगे बढ़ना पड़ा. पुलिस आरोपित के बताए रास्ते पर चल रही थी. करीब एक किलोमीटर तक चलने के बाद पुलिस जब जंगल में पहुंची तो आरोपित जगह को भूल गए. पुलिस को फिर आधा किलोमीटर आकर दूसरा रास्ता पकड़ना पड़ा. इसके बाद आरोपित स्थल दिखा पाए.

कुदाल छोड़कर लगानी पड़ी जेसीबी
शव मिलने के बाद पुलिस ने चंद कर्मियों की मदद से शव को बाहर निकालने का प्रयास किया. थोड़ी से खुदाई के बाद सोनी का सिर दिखने भी लगा लेकिन शव लेटी की जगह बैठी मुद्रा में था, इसलिए पुलिस को इस बात का भी डर था कि कहीं कुदाल से शव को हानि नहीं पहुंचे. इसलिए जेसीबी का सहारा लेना पड़ा. जेसीबी ने किनारे की मिटटी काटकर शव को बाहर निकाला.

मेरी बेटी की हत्या करने वालों को मिले फांसी
बेटी का शव देखने के बाद पिता सुबोध और मां सुमन देवी का रोरोकर बुरा हाल था. मां पोस्टमार्टम हाउस के बार जमीन में गिरकर रोती रही. पिता का कहना था कि सरकार बेटी पढ़ाओ बेटी बचाव का नारा देती है और बेटी को बचा नहीं पा रही है. किसी तरह से बेटी को पढ़ाने के लिए भेजा तो उसकी हत्या कर दी. सरकार बेटी के हत्यारों को फांसी दिलाए ताकि फिर कोई किसी बेटी की जान लेने की नहीं सोचे.

(इनपुट- मृत्युंजय पांडेय)

 

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