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झारखंड: विदेश की नौकरी छोड़कर 4 युवाओं ने शुरू की एक और श्वेत क्रांति

झारखंड की राजधानी रांची से लगे ग्रामीण इलाके में एक और श्वेत क्रांति (व्हाइट रिवॉल्यूशन) का इतिहास गढ़ा जा रहा है. यहां के ओरमांझी-सिकिदरी रोड पर भुसुर गांव में स्थित ओसोम डेयरी की सफलता के पीछे चार दोस्तों की कहानी छिपी है, जिन्होंने गांव के प्रति जुड़ाव की वजह से विदेशों की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ घर की ओर रुख कर लिया.

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विदेश की नौकरी छोड़कर गांव का रुख
विदेश की नौकरी छोड़कर गांव का रुख

झारखंड की राजधानी रांची से लगे ग्रामीण इलाके में एक और श्वेत क्रांति (व्हाइट रिवॉल्यूशन) का इतिहास गढ़ा जा रहा है. यहां के ओरमांझी-सिकिदरी रोड पर भुसुर गांव में स्थित ओसोम डेयरी की सफलता के पीछे चार दोस्तों की कहानी छिपी है, जिन्होंने गांव के प्रति जुड़ाव की वजह से विदेशों की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ घर की ओर रुख कर लिया.

अभिनव शाह, राकेश शर्मा, अभिषेक राज और हर्ष ठक्कर, 2004 में एक साथ सभी सीए बने थे. इसके साथ-साथ ही कुछ अलग करने का सपना भी देखा था लेकिन जब कुछ समझ नहीं आया और तीनों अलग-अलग शहरों में चले गए. सबने कई नामी-गिरामी कंपनियों में नौकरी की और कई शहरों में रहे. अभिनव दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू के अलावा तीन महीने लंदन में भी रहे.

विदेशों की नौकरी छोड़, गांव में नई शुरुआत
अभिषेक राज लग्जमबर्ग में मिलिकॉम नाम की टेलीकॉम कंपनी में काम करने लगे. राकेश ने भी सत्यम, डेलॉयड, लुमिनस जैसी कंपनियों को अपनी सेवाएं दीं. इस दौरान जब अभिषेक ने विदेश में रहते हुए आकर्षक डेयरी फॉर्म देखे तो उन्हें लगा कि अपने गांव में भी ऐसा ही कुछ करना चाहिए. उन्होंने अपने मन की बात राकेश और हर्ष ठक्कर से साझा की, जिसके बाद राकेश भी 2011 में ही अपनी नौकरी छोड़ रांची लौट आए. उन्हें भी अभिषेक का आइडिया अच्छा लगा और इन लोगों ने भुसुर गांव में नए सफर की शुरुआत कर दी.

एक साल में बन गए सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी
हर्ष ठक्कर ने कहा, 'लोगों को हमारी डेयरी के दूध की क्वालिटी काफी पसंद आई और अब हर रोज हम 15 हजार लीटर दूध बेच रहे हैं.' हालांकि डेयरी चलाना आसान नहीं था. पहले महीने में तीन गाएं मर गईं. एसी ऑफिसों में काम करने वाले इन युवाओं को गाय के शव तक उठाने पड़े. इन्हें कई दिनों तक खुद गोबर भी साफ करना पड़ा था. बाद में बिहार के बख्तियारपुर से उसी नस्ल की गायें लेकर आए जो टिकाऊ साबित हुईं और धीरे-धीरे काम लय पकड़ने लगा. इन्हें 15 नवंबर 2012 को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी पुरस्कार (बेस्ट यंग डेयरी इंटरप्रेन्योर अवार्ड) से सम्मानित किया.

अब इस डेयरी में 100 से ज्यादा गायें हो चुकी हैं जो प्रतिदिन 700 लीटर दूध का उत्पादन करती हैं, जो होम डिलीवरी से लेकर होटलों और दुकानों तक सप्लाई हो रहा है.

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