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राज्य सरकार ने DVC के बकाए का नहीं किया था भुगतान, केंद्र ने ऑटो डेबिट कर काटे 714 करोड़

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक, यूपी जैसे राज्यों पर भी अरबों रुपये बाकी हैं पर उन्हें रियायत देते हुए झारखंड के साथ सौतेला रवैया दिखाया गया है.

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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डीवीसी का राज्य ने नहीं किया था भुगतान
  • बीजेपी पर बरसी सोरेन सरकार
  • केंद्र सरकार पर भेदभाव का लगाया आरोप

केंद्र सरकार ने झारखंड के खाते से डीवीसी के बकाये की राशि काट ली है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आदेश पर आरबीआई ने 714 करोड़ रुपये काटते हुए इसे केंद्र के खाते में भेज दिया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस पर आपत्ति जताई है. पार्टी ने केंद्र सरकार पर गैर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है.

मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि गैर बीजेपी शासित राज्यों के साथ केंद्र लगातार दोहरा चरित्र अपना रहा है. केंद्र ने पिछले साल की तरह एक बार इस साल दूसरी बार जबरन पैसे की कटौती की है. जेएमएम नेताओं का केंद्र के इस फैसले पर गुस्सा फूट रहा है.

जेएमएम का कहना है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व्यक्तिगत तौर पर इस मसले पर केंद्र सरकार के पास अपनी बात रख चुके हैं. बावजूद इसके केंद्र के रवैये पर सवाल उठता है. विनोद पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार डीवीसी के बकाये को लेकर झारखंड के साथ गलत आचरण दिखा रही है. 

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एमपी, कर्नाटक, यूपी जैसे राज्यों को छूट!

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक, यूपी जैसे राज्यों पर भी अरबों रुपये बाकी हैं पर उन्हें रियायत देते हुए झारखंड के साथ सौतेला रवैया दिखाया गया है. केंद्र की इस तरह की हरकत के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे इस राज्य में सरकारी कर्मियों को वेतन जारी करने में चुनौती खड़ी हो सकती है.

हेमंत सरकार को मिला था खाली खजाना

जेएमएम प्रवक्ता ने कहा कि 2019 में जब हेमंत सोरेन ने सत्ता संभाली थी, तो उन्हें खाली खजाना मिला था. कोरोना संकट के बीच सरकार सीमित संसाधनों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही. बावजूद इसके केंद्र का रवैया गैर जिम्मेदाराना है. राज्य को जीएसटी, केंद्रीय करों का पैसा नहीं रिलीज किया जा रहा है. इस दिशा में केंद्र ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. सीएम की आपत्ति के बावजूद रिस्पॉन्स नहीं दिया जाना सवाल खड़े करता है.
 

 

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