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खुद को जिंदा साबित करने को 10 साल से भटक रहा बुजुर्ग दंपति, सरकारी कागजों में स्वर्गवासी

लोबिन मांझी के नाम पर सरकारी आवास भी स्वीकृत हुई, लेकिन वह यह कहकर रद्द कर दिया गया कि आप फाइलों में मृत घोषित हैं. वृद्ध दंपति ने ब्लॉक से लेकर जिले के आलाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक अपने जीवित होने की फरियाद लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं.

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खुद को जिंदा साबित करने को लंबे समय से भटक रहा बुजुर्ग दंपति खुद को जिंदा साबित करने को लंबे समय से भटक रहा बुजुर्ग दंपति
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मृत घोषित होने की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा
  • लुबिन मांझी और पत्नी को 2011 के जनगणना सर्वे में मृत घोषित कर दिया
  • कार्रवाई करेंगे, बुजुर्ग दंपति की पेंशन योजना स्वीकृतः डीसी रवि शंकर

झारखंड में दुमका जिले के रक्शा पंचायत स्थित कुल्हड़िया गांव के लोबिन मांझी और उसकी पत्नी को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है जबकि लोबिन मांझी और उसकी पत्नी अभी जिंदा हैं.

पिछले 10 साल से लोबिन खुद को जिंदा होने का सबूत अधिकारियों को दिखाते फिर रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही. इसके कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा.

खुद को जिंदा साबित करने से जुड़ी हाल में एक फिल्म आई थी. फिल्म का किरदार भारती लाल को सरकारी दस्तावेज से मरा हुआ बता दिया जाता है, जिसके बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए भारती लाल को सिस्टम से लड़ना पड़ता है. फिल्म में सरकारी दफ्तरों के कामकाज पर तल्ख टिप्पणी भी की गई है.

सरकारी कागजों में मृत घोषित

ऐसा ही एक मामला सामने आया है दुमका जिला के सरैयाहाट प्रखंड में जहां एक वृद्ध जिंदा दंपति को सरकारी कागजों में मरा हुआ बता दिया गया है. पिछले 10 साल से यह दंपति अपने को जीवित बताकर सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहा है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने इस दंपति को जीवित मानने से इनकार करते हुए सरकार द्वारा मिलने वाला लाभ देने से मना कर दिया है.

सरकारी उपेक्षा से परेशान लोबिन
सरकारी उपेक्षा से परेशान लोबिन

  
दुमका जिले में सरकारी बाबुओं के गलतियों की सजा एक बुजुर्ग दंपति को भुगतना पड़ रहा है. वृद्ध लोबिन के आंखों से छलकते आंसू उनकी व्यथा बताने के लिए काफी है. पिछले 10 साल से यह दंपति अपने आप को जीवित बताने की कोशिश कर सरैयाहाट प्रखंड मुख्यालय का चक्कर काट रहा है. लेकिन इस वृद्ध दंपति का सुनने वाला न कोई अधिकारी है और ना ही कर्मचारी.

दरअसल, दुमका जिले में सरैयाहाट प्रखंड के कोल्हाडी गांव के 75 वर्षीय लुबिन मांझी और उसकी पत्नी को साल 2011 के जनगणना सर्वे में मृत घोषित कर दिया गया. यह बात उन्हें तब पता चली जब लुबिन मांझी प्रखंड कार्यलय में वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन दिया, लेकिन लुबिन का आवेदन मृत घोषित हो जाने के कारण रद्द हो गया.

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इस बीच लोबिन के नाम पर सरकारी आवास भी स्वीकृत हुई, लेकिन वह भी यह कहकर रद्द कर दिया गया कि आप फाइलों में मृत घोषित हैं. वृद्ध दंपति ने ब्लॉक से लेकर जिले के आलाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक अपने जीवित होने की फरियाद लगाई लेकिन उनके सुनने वाले कोई नहीं.

बेटे से अलग जर्जर मकान में रह रहा दंपति

बेटे से अलग जर्जर छतिग्रस्त मकानों में दर्द को संजोये रह रहे लुबिन सिस्टम की लापरवाही ने जीते जी मार देने से काफी दुखित हैं. वह ऐसी गलती करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

जिले के डीसी रवि शंकर शुक्ला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का भरोसा जताया है और कहा कि फिलहाल बुजुर्ग दंपति की पेंशन योजना स्वीकृत कर ली गई है. उन्होंने कहा कि जिन कर्मियों के कारण वृद्ध लोबिन मांझी को तकलीफ उठानी पड़ी उसपर कार्रवाई की जाएगी.

उम्र के अंतिम पड़ाव पर जिस बुजुर्ग को आश्रय और मदद मिलनी चाहिए उन्हें मृत घोषित कर सरकारी लाभ से वंचित करना सरकारीकर्मियों की लापरवाही को उजागर कर उनके संवेदनहीनता को भी दर्शाता है.

लगातार 10 साल से सरकारी बाबुओं के चौखट पर एड़ी रगड़ने वाले दंपति न्याय नहीं मिलने से काफी दुखी हैं, लेकिन इस 75 वर्षीय दंपति ने हार नहीं मानी और उन्हें आस है कि एक दिन उन्हें न्याय जरूर मिलेगी. बहरहाल वृद्ध दंपति इसी आस में रोज सरकारी बाबुओं के दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं.

(इनपुट-मृत्युंजय पांडेय)

 

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