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Yasin Malik: स्क्वैड्रन लीडर रवि खन्ना को मारी थीं 28 गोलियां, शहीद की पत्नी बोलीं- खून का बदला खून

यासीन मलिक ने 1990 में अन्य आतंकवादियों के साथ मिलकर वायु सेना अधिकारियों पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन अधिकारियों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे.

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शहीद रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना (फाइल फोटो) शहीद रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1990 में वायु सेना अधिकारियों पर हुई थी फायरिंग
  • इस फायरिंग में तीन जवान हुए थे शहीद

टेरर फंडिंग में दोषी पाए गए कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक को एनआईए कोर्ट ने उम्रकैद की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इस बीच कश्मीर में 1990 में शहीद हुए वायु सेना अधिकारी रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने मीडिया से कहा है कि उन्हें खून बदला खून मिलना चाहिए.

शहीद रवि खन्ना की पत्नी ने यासीन मलिक को सजा मिलने के बाद कहा कि हुकूमतों को अपना काम करना है. कोर्ट से हमें पूरी उम्मीद है कि हमें पूरा न्याय मिलेगा. इस केस में कोर्ट मुझसे बेहतर जानती है कि उन्हें क्या सजा देनी है. हो सकता है कि वो इस सजा के दौरान वो सभी सबूत जुटा लें, जो सजा-ए-मौत के लिए पर्याप्त हों.
इसके बाद उन्होंने कहा कि यह उसके (यासीन मलिक) द्वारा किए गए आतंकी हमलों के पीड़ितों के लिए न्याय है. कुछ लोग संतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन मैं संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि मैं अपने मामले में उसकी मौत की सजा चाहती हूं. 

पूरे देश को फैसले का सम्मान करना चाहिए 

निर्मल खन्ना ने आजतक से बातचीत में कहा कि इस फैसले का पूरे देश को सम्मान करना चाहिए. मेरा केस अलग है. ये टेरर फंडिंग का केस है, जो टेरर फैलाने के लिए दूसरे देशों से लिया गया है. हमारे देश ने भी इसमें सहयोग दिया है. मैं यासीन को एक संदेश देना चाहती हूं. उसको आज ही से अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए कलम कागज पकड़ लेना चाहिए और आज की तारीख डालकर सब लिखना चाहिए, जो-जो उसने किया है. उसे प्रायश्चित का समय मिला है. उसको आने वाली पीढि़यों को पैगाम देना चाहिए. जो जिस धरती पर पैदा हुआ है उसी का लाल है, उसकी वफादारी निभानी चाहिए. खुद जीओ और औरों को जीने दो.

1990 में अधिकारियों पर की थी फायरिंग

यासीन मलिक ने 1990 में अन्य आतंकवादियों के साथ मिलकर वायु सेना अधिकारियों पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन अधिकारियों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे. मरने वालों में स्क्वैड्रन लीडर रवि खन्ना भी थे. रवि खन्ना के शरीर पर गोलियों के 28 निशान थे.

मेरे पति को लगी थीं 28 गोलियां

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मैंने खुद जाकर देखा था कि 28 गोलियां मेरे हसबैंड को लगी थीं. लेफ्टिनेंट जनरल बीआर शर्मा पेड के पीछे जाकर लेट गए और बच गए. मैंने अपने घर के बाहर से देखा था कि उनके शव का घेरा बनाकर बहुत लोग नाच रहे हैं. मुझे महाभारत का सीन याद आया, जिसमें अभिमन्यु को मारने के बाद कौरव नाच रहे थे.

मेरे घर के नीचे सड़क थी, वहां से सब दिख रहा था. जब मैं वहां गई तो देखा कि ब्रीफकेस पर गोली लगी है. मैंने सोचा गोली लगने से एक जवान लेट गया तो देश का क्या होगा. तब तक एयरफोर्स की गाड़ी आ गई थी. बस तो पहुंच चुकी थी, लेकिन तब तक ये सभी आतंकी भाग गए थे. मैं यासीन मलिक को पहचानती नहीं थी. बीआर शर्मा ने ही मुझे ये बताया था. 

32 साल से वो जिंदा कैसे ?

यासीन मलिका का एजेंडा था इसलिए उसने उन्हें एक बार मारा, इंडियन सेना को टारगेट किया, जिसमें मेरे हसबैंड और तीन और जवान शहीद हुए. हुकूमतों ने 32 साल चार महीने लगा दिए हैं, अभी तक इंसाफ नहीं मिला है. दिक्कत मुझे ये हैं कि वो इतने दिन तक जिंदा रह लिया. खून बदला खून मिलना चाहिए. 
 

 

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