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सुरेश रैना ने जम्मू-कश्मीर के DGP को लिखा पत्र, बच्चों को सिखाना चाहते हैं क्रिकेट

सुरेश रैना केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के युवाओं को क्रिकेट के लिए प्रशिक्षित करना चाहते हैं. इसके लिए सुरेश रैना ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह को पत्र लिखा है. रैना ने अपने पत्र में सूबे के बच्चों के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अनुभव को साझा करने की इच्छा जताई है.

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सुरेश रैना (फाइल फोटो)
सुरेश रैना (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुरेश रैना ने J-K के डीजीपी को लिखा पत्र
  • बच्चों को क्रिकेट के लिए तैयार करना चाहते हैं रैना
  • रैना ने कहा- मेरा 15 साल का अनुभव बच्चों के काम आएगा

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी सुरेश रैना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है. 15 अगस्त को अपनी रिटायरमेंट की घोषणा कर सुरेश रैना ने सबको चौंका दिया. सुरेश रैना के फैन्स उन्हें एक बार फिर इंटरनेशनल पिच पर खेलते देखना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अपने मेंटोर महेंद्र सिंह धोनी के साथ रिटायरमेंट की घोषणा कर सबकी उम्मीदें तोड़ दीं. अब सुरेश रैना एक अलग काम करना चाहते हैं.

सुरेश रैना केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के युवाओं को क्रिकेट के लिए प्रशिक्षित करना चाहते हैं. इसके लिए सुरेश रैना ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह को पत्र लिखा है. रैना ने अपने पत्र में सूबे के बच्चों के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अनुभव को साझा करने की इच्छा जताई है, जो कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों के भविष्य में काम आ सके.

रैना ने लिखा, 'मैं ये पत्र बहुत उम्मीद के साथ लिख रहा हूं. मैं प्रदेश में क्रिकेट को शुरू और प्रमोट करना चाहता हूं. इससे वंचित बच्चों को क्रिकेट में अपना भविष्य बनाने का एक अवसर मिलेगा. मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट फील्ड पर 15 साल से ज्यादा बैटिंग की है. मैं अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल बच्चों के लिए करना चाहता हूं. मेरा उद्देश्य गांव, स्कूल और कॉलेज से होनहार बच्चों की तलाश करना है. मैं इस मौके का इस्तेमाल ऐसे बच्चों पर करना चाहता हूं जो भविष्य में राष्ट्रीय टीम में अपना योगदान दे सकें.'

रैना ने पांच पॉइंट में अपने मास्टर प्लान को समझाने की कोशिश की है-

- टैलेंट हंट फ्रॉम स्कूल, कॉलेज एंड रूरल एरिया ऑफ जम्मू-कश्मीर
- ऑग्रेनाइजिंग मास्टर क्लास
- मेंटल टफनेस कोर्स
- फिजिकल फिटनेस
- स्किल ट्रेनिंग

रैना ने आगे लिखा, 'क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है, ये नैतिकता, अनुशासन, फिटनेस, मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ भी रखता है. जब कोई बच्चा स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग से गुजरता है तो वह खुद ही अपने दिनचर्या में अनुशासन का ध्यान रखता है. ये हमारे देश का भविष्य हो सकता है. मेरा विश्वास पक्का है. बच्चों के माध्यम से हम हमारे देश का एक आशाजनक कल बनाने में उपयोग कर सकते हैं.


 

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