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उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर क्यों लगा PSA, J-K पुलिस ने बताई वजह

नियम के मुताबिक किसी को एहतियात के तौर पर हिरासत में लेने के बाद उसकी हिरासत 6 महीने के बाद तभी बढ़ाई जा सकती है जब 6 महीने पूरे होने से दो महीने पहले एडवायजरी बोर्ड बनाकर इस पर विचार किया जाए.

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को 5 अगस्त को हिरासत में लिया गया था उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को 5 अगस्त को हिरासत में लिया गया था

  • डॉजियर में बताया उमर-महबूबा पर पीएसए लगाने का कारण
  • कश्मीर में दोनों नेताओं को 5 अगस्त को हिरासत में लिया गया
  • महबूबा मुफ्ती पर अलगाववादी नेता होने का लगा आरोप

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ्ती को पीएसए के तहत हिरासत में लिए जाने की वजह बताई है. डॉजियर में पुलिस ने बताया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का कश्मीर में बड़ा प्रभाव है. ऐसे में वह सोशल मीडिया के जरिए लोगों को प्रभावित कर सकते हैं. जबकि महबूबा मुफ्ती के बारे में कहा गया है कि वह एक अलगाववादी नेता रही हैं. यही कारण है कि दोनों को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के 49 वर्षीय नेता उमर अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की 60 वर्षीय नेता महबूबा मुफ्ती को 5 अगस्त को हिरासत में लिया गया था. जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया गया और उसे लद्दाख एवं जम्मू-कश्मीर दो राज्यों में बांट दिया गया था. इन दोनों नेताओं की हिरासत 6 फरवरी को खत्म हो रही थी. तब 6 फरवरी को ही दोनों नेताओं को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत हिरासत में ले लिया गया था. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दोनों नेताओं को पीएसए के तहत हिरासत में लिए जाने का कारण बताया है.

पीएसए के तहत क्या कहता है नियम

नियम के मुताबिक किसी को एहतियात के तौर पर हिरासत में लेने के बाद उसकी हिरासत 6 महीने के बाद तभी बढ़ाई जा सकती है जब 6 महीने पूरे होने से दो महीने पहले एडवायजरी बोर्ड बनाकर इस पर विचार किया जाए. सरकार ने ऐसे किसी बोर्ड का गठन नहीं किया था. ऐसे में सरकार के पास मात्र दो विकल्प थे- या तो दोनों नेताओं को छोड़ दिया जाए या पीएसए के तहत हिरासत में लिया जाए.

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क्या हैं उमर अब्दुल्ला पर आरोप?

तीन पेज के डॉजियर के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जुलाई में पार्टी की बैठक की थी. आरोप है कि इसमें उमर ने लोगों को मोबलाइज करने की कोशिश की थी ताकि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 नहीं हटाया जा सके. साथ ही डॉजियर में यह भी कहा गया है कि उमर केंद्र में विदेश मंत्रालय जैसे विभाग को संभाल चुके हैं और वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. हालांकि इसमें उनकी किसी खास पोस्ट का जिक्र नहीं है.  

महबूबा मुफ्ती पर हैं ये आरोप

डॉजियर में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ्ती के बारे में कहा गया है कि उन्होंने देश विरोधी बयान दिए हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामिया जैसे संगठनों को समर्थन दिया. इस संगठन पर यूएपीए एक्ट के तहत बैन लगाया गया है. हालांकि पीडीपी 18 जून तक भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी रही है.

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बता दें कि 1978 में उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में पीएसए लागू किया था. यह कानून लकड़ी की तस्करी करने वालों के खिलाफ बना था. इसके बाद 2010 में जम्मू-कश्मीर में हालात खराब हुए और पीएसए लगाया गया, तब वहां के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला थे. लोग सड़कों पर थे और इस प्रदर्शन के दौरान 110 लोग मारे गए थे. उमर के पिता और 5 बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे फारुक अब्दुल्ला के खिलाफ भी सितंबर में पीएसए के तहत केस दर्ज किया गया था.

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