जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क और डिजिटल मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ में एक प्रमुख लश्कर-ए-तैयबा आतंकी ने खुलासा किया है कि आतंकवादी नेटवर्क अब कई सुरक्षित और निजी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह खुलासा उस समय हुआ जब श्रीनगर पुलिस ने पिछले महीने एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया.
पुलिस ने इस कार्रवाई में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर निवासी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा और एक अन्य पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उस्मान जट्ट को गिरफ्तार किया था. इनके साथ कश्मीर में सक्रिय कई ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को भी पकड़ा गया. अधिकारियों के अनुसार यह मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर के बाहर ठिकाने बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहा था.
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मामले के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को देखते हुए इसकी जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है. एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार कई देशों तक जुड़े हो सकते हैं.
कई सुरक्षित ऐप्स के इस्तेमाल का खुलासा
जांच के दौरान अबू हुरैरा ने बताया कि वह और उसकी टीम कई एप्लिकेशन का उपयोग कर रही थी. इनमें BBM, Element, Threema और Dust जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इसके अलावा मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp, Telegram, Skipee और Signal का भी इस्तेमाल किया जा रहा था.
BlackBerry Messenger (BBM) पहले भी 2009 में जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुका था. उस समय सरकार ने इसकी सेवाओं पर प्रतिबंध की चेतावनी दी थी, जब तक कि इसकी निर्माता कंपनी Research In Motion भारत में सर्वर स्थापित नहीं करती. बाद में 2011–12 में सर्वर स्थापित किए गए थे.
हालांकि, 2019 में BBM ने अपनी मुफ्त सेवाएं बंद कर BBM Enterprise नाम से कॉर्पोरेट उपयोग के लिए भुगतान आधारित सेवा शुरू कर दी. अब जांच एजेंसियां उन BBM Enterprise खातों के मालिकों का पता लगाने में जुटी हैं, जिनका इस्तेमाल आतंकियों द्वारा किया गया.
थ्रीमा और एलिमेंट पर बढ़ी चिंता
अधिकारियों के अनुसार 2016 से जम्मू-कश्मीर में डिजिटल तकनीकों की निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. विशेष रूप से स्विट्जरलैंड आधारित मैसेजिंग ऐप Threema पर चिंता जताई गई है, क्योंकि यह बिना फोन नंबर या ईमेल के पूरी तरह गुमनाम संचार की सुविधा देता है.
मई 2023 में केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय की सिफारिश पर 14 मैसेजिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था. इनमें लंदन स्थित Element Creations Limited द्वारा संचालित Element प्लेटफॉर्म भी शामिल था. यह ऐप Matrix ओपन-स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पर आधारित है.
Element पर प्रतिबंध का मुख्य कारण जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल द्वारा निगरानी से बचने के लिए इसका उपयोग बताया गया. इसके अलावा Dust ऐप भी जांच एजेंसियों की निगरानी में है, क्योंकि इसमें संदेश पढ़ते ही या 24 घंटे के भीतर गायब हो जाते हैं.
VPN और सोशल मीडिया से बढ़ा खतरा
अधिकारियों का कहना है कि आतंकी संगठन इन ऐप्स तक पहुंचने के लिए आमतौर पर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग करते हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रसार ने आतंकवादी संगठनों को संचार और नेटवर्क विस्तार के लिए नया माध्यम प्रदान किया है.
जांच एजेंसियों ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ लोग अतिवादी राष्ट्रवादी बनकर कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े पाए गए हैं, जिनमें प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का नाम भी सामने आया है.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र भी बार-बार चेतावनी दे चुका है कि आतंकी संगठन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग भर्ती, प्रचार और हिंसा भड़काने के लिए कर रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदम
इन चुनौतियों के जवाब में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2017 में प्रस्ताव 2354 पारित किया था. इसे ‘कॉम्प्रिहेंसिव इंटरनेशनल फ्रेमवर्क’ कहा जाता है.
इस प्रस्ताव में कानूनी और कानून प्रवर्तन उपायों को मजबूत करने, सार्वजनिक-निजी साझेदारी बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी काउंटर-नैरेटिव विकसित करने पर जोर दिया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि बदलती तकनीक के साथ आतंकी नेटवर्क भी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, जिससे साइबर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं.