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महबूबा मुफ्ती बोलीं- कश्मीरी छात्रों की पिटाई हो रही है और प्रधानमंत्री चुप हैं

पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी छात्रों के हो रही मारपीट की घटना की भी हम निंदा करते हैं. कम से कम प्रधानमंत्री को इस पर अपने मन की बात करनी चाहिए.

पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो-AP) पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो-AP)

पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीरी छात्रों पर हो रहे हमले की पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने निंदा की. इंडिया टुडे ग्रुप के मैनेजिंग डॉयरेक्टर राहुल कंवल के साथ खास बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम पुलवामा हमले से हम अचंभित हैं, अभी भी इस हमले के दर्द से हम बाहर नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन कश्मीरी छात्रों के हो रही मारपीट की घटना की भी हम निंदा करते हैं. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी तक चुप हैं.

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि देश के बाकी हिस्सों में पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी छात्रों के साथ जैसा सलूक किया जा रहा है. जो उनके साथ हो रहा है, वह गलत हो रहा है. उनका क्या कसूर है. वह बेगुनाह है. वो कश्मीर से इसलिए बाहर चले जाते हैं, पढ़ने या कारोबार करने के लिए क्योंकि यहां के हालात सही नहीं हैं. कश्मीर से भागकर वह पूरे मुल्क के अंदर जाते हैं, अब उनके साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, जिसकी निंदा की जानी चाहिए.

पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी छात्रों की पिटाई के मामले में अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई बात नहीं कही. हम सुप्रीम कोर्ट के बहुत शुक्रगुजार हैं, उन्होंने दिशा निर्देश जारी किया है, लेकिन प्रधानमंत्री को भी इस पर कुछ बोलना चाहिए था. यह बच्चे अपने मां-बाप की दौलत हैं, वो मुल्क पर भरोसा करके, मुल्क के अंदर भेजते हैं. मुल्क के अंदर उनके साथ ऐसा सलूक होगा, तो क्या करेंगे वो.

मेघालय के राज्यपाल को बर्खास्त करने की मांग करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमने बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए बहुत बड़ी कुर्बानी दी थी. उरी हुआ या फिर अमरनाथ यात्रा पर हमला हुआ तो देश के किसी भी कोने में कश्मीरी छात्रों के साथ छेड़छाड़ या मारपीट की घटना नहीं हुई, क्योंकि उस वक्त हम सरकार में थे. उस समय बीजेपी कोशिश करती थी कि हालात को काबू में रखा जाए. लेकिन अब सरकार नहीं है तो कश्मीरी छात्रों पर अत्याचार की घटना हो रही है. उनको जेल में डाला जा रहा है. कम से कम प्रधानमंत्री को इस पर अपने मन की बात करनी चाहिए.

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