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कश्मीर में बच्चों को उपद्रवियों का डर, स्कूल खुलने के बाद भी खाली हैं कक्षाएं

मंगलवार को घाटी में स्कूल खुलने का दूसरा दिन है. कई जगह स्कूल खुले, बच्चे भी पहुंचे लेकिन उपस्थिति कम रही. कई जगह बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए पहुंची बस को खाली ही लौटना पड़ा.

घाटी में स्कूल खुले फिर भी पसरा है सन्नाटा (फोटो: AP) घाटी में स्कूल खुले फिर भी पसरा है सन्नाटा (फोटो: AP)

  • जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर खुले स्कूल
  • बच्चों के अभिभावकों में पत्थरबाजी का डर
  • प्रदेश में 14 दिन बाद खुले हैं स्कूल
  • अभी भी कश्मीर में लागू है धारा 144

अनुच्छेद 370 कमजोर होने के बाद सोमवार से कश्मीर घाटी में स्कूल खुलने शुरू हो गए हैं. मंगलवार को घाटी में स्कूल खुलने का दूसरा दिन था. कई जगह स्कूल खुले, बच्चे भी पहुंचे लेकिन उपस्थिति कम ही रही. कई जगह बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए पहुंची बस को खाली ही लौटना पड़ा. हालांकि स्कूलों में स्टाफ मौजूद रहे. स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को डर है कि कहीं रास्ते में उनके बच्चों पर पत्थर ना फेंके जाएं.

दरअसल, बच्चों के अभिभावकों के मन में अभी भी सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल हैं, तभी वह स्कूल भेजने से बच्चों को रोक रहे हैं.

घाटी के ही एक स्कूल के बस ड्राइवर ने बताया कि वह बच्चों को लेने गए थे, लेकिन कोई भी आने को तैयार नहीं था. क्योंकि बच्चों के अभिभावकों को स्कूल की टाइमिंग के बारे में नहीं पता था. कुछ अभिभावकों को डर था कि अगर बच्चे स्कूल बस में जाते हैं तो उन पर पत्थर फेंके जा सकते हैं.

श्रीनगर की रहने वाली सौफिया का बच्चा चौथी क्लास में पढ़ता है, लेकिन वह उन्हें स्कूल नहीं भेज रही हैं. क्योंकि उन्हें डर है कि इस तनाव भरे माहौल में कुछ बुरा ना हो जाए.

दूसरी ओर श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वह लेते हैं. 15 दिन से स्कूल बंद हैं, हमें कहीं से तो शुरुआत करनी होगी. कई अभिभावक भी चाहते हैं कि स्कूल जल्द से जल्द खुले.

12वीं क्लास में पढ़ने वाले अशरफ का कहना है कि वह 12वीं क्लास में हैं इसी वजह से उनकी पढ़ाई काफी जरूरी है. उन्हें कई तरह के एग्जाम की तैयारी करनी है लेकिन इंटरनेट की सुविधा नहीं है. वह जल्द से जल्द स्कूल ज्वाइन करना चाहते हैं. हालांकि जो स्कूल आर्मी से जुड़े हुए हैं वो पूरी तरह से खुले हैं.

घाटी में कुछ जगह पत्थरबाजी की घटना भी सामने आई है, जहां कुछ लोगों ने नागरिकों की गाड़ी पर ही पत्थर फेंके. हालांकि, ऐसी घटनाओं की संख्या काफी कम रही और तुरंत ही सुरक्षाबलों ने इन पर काबू पा लिया.  

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