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जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म खोलने के फैसले से स्टेक-होल्डर्स खुश, लोग खफा

पिछले साल अगस्त में शटडाउन शुरू होने के बाद से इस सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. पिछले साल अगस्त में केंद्र की ओर से जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद शटडाउन लागू किया गया था.

J-K में टूरिज्म सेक्टर को खोलने का लिया गया फैसला (फाइल फोटो) J-K में टूरिज्म सेक्टर को खोलने का लिया गया फैसला (फाइल फोटो)

  • J-K प्रशासन ने सोमवार को टूरिज्म सेक्टर खोलने का लिया फैसला
  • स्टेक-होल्डर्स ने प्रशासन के फैसले का किया स्वागत

कोविड महामारी की शुरुआत के बाद लॉकडाउन से बंद पड़े जम्मू और कश्मीर के टूरिज्म सेक्टर के लिए अच्छी खबर है. जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को टूरिज्म सेक्टर को फिर से खोलने का फैसला किया.

पिछले साल अगस्त में शटडाउन शुरू होने के बाद से इस सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. पिछले साल अगस्त में केंद्र की ओर से जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद शटडाउन लागू किया गया था.

जम्मू और कश्मीर के प्रवक्ता रोहित कंसल ने सोमवार देर रात ट्वीट में कहा, “जम्मू और कश्मीर टूरिज्म को जल्दी खोलेगा. सरकार जल्दी ही विस्तृत गाइडलांइस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) जारी करेगी. LG (उपराज्यपाल) ने श्रीनगर में आज उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए.”

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तो इस घटनाक्रम पर कश्मीर में टूरिज्म से जुड़े हितधारकों (स्टेक होल्डर्स) की क्या प्रतिक्रिया है? पहलगाम के प्रसिद्ध टूरिस्ट रिजॉर्ट के संचालक और होटल व्यवसाय से जुड़े हुसैन खान ने कहा, “यह एक अच्छा घटनाक्रम है लेकिन सिर्फ अगर लोग वास्तव में आते हैं. निश्चित रूप से Covid-19 का वहां खतरा है, लेकिन जब अन्य सेक्टर खुल रहे हैं तो हमारा ही क्यों नुकसान सहे. हालांकि हम सुनिश्चित करेंगे कि सभी सुरक्षा प्रावधानों का पालन हो.”

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एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक उपराज्यपाल जीसी मुर्मू की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ये फैसला किया गया. उपराज्यपाल ने टूरिज्म सेक्टर को खोलने के निर्देश दिए हैं. ये तथ्य है कि इस सेक्टर को केंद्र शासित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

टूरिज्म से जुड़े एक और स्टेकहोल्डर ने कहा कि यह एक तार्किक कदम है लेकिन उच्च गति के इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी रहने से टूरिज्म अपनी क्षमता को प्राप्त नहीं कर सकता. स्थानीय नागरिक दानिश ने कहा, "मुझे लगता है कि पर्यटन 4 जी पर निर्भर है, जो अभी भी जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित है.”

धारा 370 के निरस्त होने के बाद से घाटी में कई महीनों तक लॉकडाउन रहा था. वहां कर्फ्यू लगा था और लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित थी. इंटरनेट सेवा सहित संचार की सभी लाइन कट ऑफ थीं. जबकि कम्युनिकेशन धीरे-धीरे बहाल हो गया, लेकिन हाई स्पीड इंटरनेट अभी भी बाधित है.

इसके बाद कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुई. सभी पर्यटन संबंधी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई. अधिकांश पर्यटन स्थलों को प्रशासन की ओर से बंद करने के आदेश दिए गए.इस साल श्रीनगर में प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन, जो एशिया में सबसे बड़ा है, वहां भी विजिटर्स नहीं आए.

टूरिज्म उद्योग से जुड़े लोग सेक्टर को खोलने का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन कई स्थानीय नागरिक इससे खुश नहीं हैं. ऐसे ही एक शख्स मुदासिर ने कहा, “जब महामारी बड़े पैमाने पर फैल रही है तो इस फैसले के पीछे तर्क क्या है? हमें पहले जान बचाने के बारे में सोचना चाहिए."

एक और स्थानीय नागरिक ओवैस ने कहा, “पूरा कश्मीर रेडजोन में है और उन्होंने बाहरी लोगों के लिए पर्यटन स्थल खोलने का फैसला किया है, यह कैसे काम करेगा?”

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